15 घंटे चली बातचीत के बाद आर्मी ने कहा- पूर्वी लद्दाख से सेनाएं पीछे करने की प्रक्रिया पेचीदा, इस पर लगातार नजर रखने की जरूरत

भारत-चीन सीमा विवाद पर चीन के अड़ियल रवैए की खबरों के बीच गुरुवार को भारतीय सेना ने आधिकारिक बयान जारी किया। सेना के अधिकारियों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि दोनों देश पूरी तरह से सेना हटाने के लिए पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख से सेनाओं को हटाने की प्रक्रिया बहुत पेचीदा है, इसलिए इस पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मामले को डिप्लोमैटिक और मिलिट्री लेवल पर लगातार बैठकों के जरिए आगे ले जाया जा रहा है।

सेना के अफसरों के मुताबिक, भारतीय सेना और पीएलए के कमांडरों के बीच 14 जुलाई को चुशुल में चौथे दौर की बैठक हुई। भारत-चीन के प्रतिनिधियों के बीच सेना को पूरी तरह पीछे हटाने को लेकर 5 जुलाई को बनी सहमित को अमल में लाया जा रहा है। वहीं, सीनियर कमांडरों ने पहले फेज में सेना को हटाने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं को पूरी तरह पीछे हटाने को लेकर चर्चा भी हुई।

भारत ने एलएसी पर अप्रैल-मई की स्थिति बहाल करने की मांग की थी
न्यूज एजेंसी ने बुधवार को सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि चीन फिंगर एरिया से पूरी तरह पीछे हटने को तैयार नहीं है। बाकी विवादित क्षेत्रों से पीछे हटने को तैयार है। वहीं, भारत ने एलएसी पर अप्रैल-मई की स्थिति बहाल करने की मांग की थी।

शुक्रवार को रक्षामंत्री और आर्मी चीफ लेह जाएंगे
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे शुक्रवार को लेह जाएंगे। वहां पर वे पूर्वी लद्दाख में सुरक्षा हालातों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान रक्षा मंत्री सेना के बड़े अफसरों के साथ हाई लेवल मीटिंग भी कर सकते हैं।

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