हमारी मौत पे कोई न आना आंसू बहाने..

भोपाल में सूदखोरी से परेशान होकर जहर पीने वाले परिवार का सच डराने वाला है। तीन महिलाओं के जाल में फंसे परिवार ने मकान से लेकर प्लाट और दुकान तक गिरवी रख दिया था। हालात यह हो गए कि माता-पिता स्कूल में पढ़ने वाली छोटी बेटी से लेकर बीई कर रही बड़ी बेटी की फीस तक नहीं भर पा रहे थे। परिवार के पास भोपाल के साथ ही चेन्नई में भी प्रॉपर्टी है।

कर्जे का तगादा करने वालों की घर पर लाइन लगी रहती। घर से निकलते ही मारने और बेटियों को उठा लेने तक की धमकियां मिलती थीं। अकसर गाली-गलौज और बेइज्जती से परेशान परिवार ने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया। यह दर्द संजीव की पत्नी अर्चना ने अपने सुसाइड नोट में बयां किया है। सुसाइड नोट 13 पेज का है। इसमें मौत के बाद जायदाद का कौन सा हिस्सा किसे दिया जाए यह भी लिखा है। इसके अलावा दीवारों पर जगह-जगह सुसाइड नोट लिखे गए हैं। इसमें बबली, उर्मिला और रीना का नाम लिखा है। इसके अलावा राजू राय और लक्ष्मी राय का भी जिक्र है। इसी के आधार पर पुलिस ने अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

सुसाइड नोट में मां का दर्द इस तरह छलका

हमारी मौत पे कोई न आना आंसू बहाने
अफसोस जताने वक्त पर आए होते तो
ये नहीं होता, न मैं न मेरा परिवार यहां शान से सोता
अब आए हो क्यों मगरमच्छ के आंसू बहाने…
मरे हुए को अपना बनाने, बहुत गुरूर है तुम्हें तुम्हारी दौलत पे
पर कमाई ये हम से ही नोंचकर कमाई है
खुद के लालच में हमें उलझा दिया
मरते प्रकृति की मौत तो बेहतर था
तुमने मरने पे मजबूर किया
मरकर भी सुकूं नहीं पाएंगे ये संसार
तुम चाहे पैसों से जीत लेना
बुला लेना किसी को भी
तुमने हमें जीते जी मारा है
हम तुम्हें मरकर मारेंगे हम रूह सही तुम्हें बर्बाद कर ही छोड़ेंगे

– अर्चना आरची

सुसाइड नोट के अंश…

मुझे बबली द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कल जब मैं बैंक गई थी, तब भी उसने घर आकर पूरे मोहल्ले में चीख-चीखकर मेरे बारे में अपशब्द (गालियों को हटा दिया है) कहे। उसके साथ उर्मिला भी थी। इसने भी इसी तरह की बात की। थाने में आवेदन लगा हुआ है कि मकान बिकने के बाद पैसे देंगे, पर इसने नहीं माना और कहा कि जिसको मकान बेचना होता है वह बोर्ड लगता है। हमारे मकान का करार हो चुका है, हम सेटलमेंट के लिए गए थे।

मेरी बेटी ने कहा कि मम्मी के आने के बाद आना, तो बहुत ज्यादा अपशब्द पूरे मोहल्ले में कहती हुई गई। बाद में मैंने जब उर्मिला जी को फोन किया, तो उन्होंने मुझे और मेरे बेटियों को उठाने की धमकी दी कि हम पैसे वसूलना जानते हैं। तुम्हारी बेटियों को और तुम्हें उठवा सकते हैं। मैं अब मानसिक रूप से त्रस्त होकर परिवार सहित आत्महत्या कर रही हूं। मैंने जितने लोगों से पैसे लिए हैं, सब मैंने बबली को ही दिए हैं। फिर भी इसने तीन लाख 72 हजार का लिखकर दिया। हम तैयार थे देने को, पर इसने हमारी इतनी बेइज्जती कर दी कि हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा।

हमें बहुत प्लानिंग करके फंसाया गया है। अशोका गार्डन में रहने वाली बबली उसकी लड़की रानी, उर्मिला इन सबने हमारा जीना दुश्वार कर दिया। इन सब की एक चेन चलती है। ये आपस में लोगों को उलझाकर बर्बाद कर देते हैं। हमारे रिश्तेदारों से लाया गया पैसा भी मैंने बबली को ही दिया है। अब वह मुकर रही है। इसने हमें अपने रिश्तेदार से मिलवाया। ये ब्याज पर पैसे देते हैं। आप उन्हें मैसेज अपने मोबाइल से कीजिए तभी वे पैसे देंगे। हमने भी वही किया और हमने हेमंत के पास अपने घर का सब सामान 30 हजार रुपए में गिरवी रख दिया है। उसने 3 हजार रुपए काटकर 27 हजार रुपए दिए। वो भी हमने बबली को दिए।

अभी भी इनके पास हमारे चेक होंगे। मकान के अलावा भी हम लोन का प्रयास कर रहे थे। ये इतनी सीधी बन जाती हैं कि मैं विधवा हूं। किराए के घर में रहती हूं तो या तो ये पैसे का झूठ बोल रही है। आज तक इन्होंने कभी हमें उन लोगों से मिलवाया नहीं। बस एक कागज में लिखकर दिया पर इतना मजबूर कर दिया कि हम सुसाइड करने पर मजबूर हो गए। हमें उलझाने वाले राजू राय ने मात्र 30 हजार रुपए दिए। उसके चार लाख बना लिए। हम लक्ष्मी राय और राजू राय को भी दो लाख से ज्यादा दे चुके हैं। कल तक का ब्याज भी दिया। 23 नवंबर तक का ब्याज प्रतिदिन 500 के हिसाब से दिया है। इन्होंने भी हमें मजबूर करके समझौता बनवाया। इनके पास और ओम जी के पास हमारे और हमारे पति के 20 से ऊपर के चेक हैं। इन्होंने हर बार अपने घर बुलाकर ही बात की। उसे अपने अनुसार रिकॉर्ड भी किया।

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