सुलह का रास्ता खुला होने के संकेत / पायलट ने दिनभर चुप्पी साधे रखी; गहलोत ने एक बार भी पायलट का नाम नहीं लिया, रेजोल्यूशन में भी डिप्टी सीएम का जिक्र नहीं

जयपुर. राजस्थान का सियासी संकट दिलचस्प मोड़ पर है। सचिन पायलट के रुख को देखकर माना जा रहा था कि अब वे कांग्रेस से बगावत के रास्ते पर आगे बढ़ चुके हैं। लेकिन, सोमवार की शाम तक नजारा कुछ बदलता नजर आया। अब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान पायलट और गहलोत के बीच सुलह का रास्ता तलाश रहे हैं। इसके तीन संकेत नजर आए।

1- पायलट चुप रहे, गहलोत भी कुछ नहीं बोले
सोमवार को दिनभर राजनीतिक सरगर्मी चलती रही। लेकिन, न तो पायलट का कोई बयान सामने आया और न ही गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर सचिन का नाम लिया। यह साफ था कि पायलट विधायक दल की बैठक में नहीं जाएंगे। तब इस चर्चा ने जोर पकड़ा था कि पार्टी बैठक में न जाने पर पायलट को पार्टी से निकाला जा सकता है। लेकिन सोमवार के घटनाक्रम में रणदीप सुरजेवाला ने भी पायलट के लिए अपना नरम रुख रखा। प्रेस कान्फ्रेंस मे उन्होंने भाजपा पर ही निशाना साधा। विधायक दल की बैठक में भी एक प्रस्ताव पास हुआ। इसमें अनुशासनहीनता करने वाले विधायकों को पार्टी से बाहर करने का जिक्र था। इसमें भी पायलट का नाम लिए बिना प्रस्ताव पास किया गया। हालांकि, शाम को मैसेज दिया गया कि पायलट समेत सभी बागी विधायक कार्रवाई के लिए तैयार रहें। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार की मीटिंग में फिर से पायलट को पहुंचने के लिए कहा, हालांकि पायलट ने इनकार कर दिया।

2- पहले पायलट के पोस्टर हटाए गए, फिर लगाए गए
सोमवार सुबह जयपुर कांग्रेस ऑफिस से पायलट के पोस्टर हटा दिए गए। तब इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया कि पायलट का कांग्रेस से रिश्ता टूटने वाला है। आरोप था कि एनएसआईयू के कार्यकर्ता ने पोस्टर हटाया है। लेकिन बाद में एनएसआईयू के अध्यक्ष ने कहा कि पायलट के पोस्टर हटाने वाले आसामाजिक तत्व थे। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

3-पायलट के भाजपा के करीब जाने का कोई इशारा नहीं मिला
दिल्ली में मौजूद सचिन पायलट रविवार को एग्रेसिव नजर आ रहे थे। यहां तक खबर आई थी कि वे सोमवार को भाजपा में शामिल हो जाएंगे, लेकिन सोमवार को पायलट खेमा पूरी तरह चुप रहा। दिल्ली में भी पायलट गुट की कोई ऐसी एक्टिविटी नहीं दिखी कि वे भाजपा के करीब जा रहे हैं। दोपहर बाद खबर आई कि पायलट भाजपा में शामिल नहीं होंगे।

इन संकेतों के राजनीतिक मायने?
सियासी जानकार यह मतलब निकाल रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान सुलह का रास्ता तलाशने के लिए पायलट की कुछ मांगे मान सकते हैं। जैसे पायलट समर्थकों को दिया गया एसओजी का नोटिस वापस लिया जाएगा। पायलट, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने की खबरों से भी नाराज चल रहे थे। उनका प्रदेश अध्यक्ष पद बरकरार रखा जा सकता है। आलाकमान पायलट की यह मांग भी मान सकते हैं कि गहलोत अपनी सरकार में दूसरा उपमुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। पायलट की नाराजगी की एक वजह यह भी बताई जाती है कि गहलोत सरकार में एक और उपमुख्यमंत्री बनाने की सोच रहे हैं।

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