सपा के 5 नेताओं को पीड़ित के परिवार से मिलने की इजाजत, रालोद उपाध्यक्ष भी परिजन से मिले; सपा-रालोद कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज

उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप पीड़ित का गांव बूलगढ़ी सियासी पार्टियों के लिए अखाड़ा बन चुका है। रविवार को समाजवादी पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बूलगढ़ी गांव पहुंचा। पुलिस ने सपा कार्यकर्ताओं को गांव के बाहर ही बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। सपा नेता और पुलिस आमने-सामने आ गए। बातचीत के बाद पुलिस ने दो पूर्व सांसदों धर्मेंद्र यादव, रामजी लाल सुमन समेत 5 लोगों को पीड़ित के परिवार से मिलने की इजाजत दी।

वहीं, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। रालोद और सपा कार्यकर्ताओं के हंगामा करने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। वहीं, भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी ससनी (हाथरस का कस्बा) से बूलगढ़ी गांव के लिए पैदल निकले हैं। ससनी में पुलिस ने उनके काफिले को रोक दिया था। इसके बाद वे और उनके समर्थक आगरा-अलीगढ़ हाईवे से होते हुए बूलगढ़ी के लिए निकले।
एसआईटी पिता का बयान लेने पहुंची गांव
योगी सरकार की तरफ से गठित एसआईटी पीड़ित परिवार का बयान दर्ज करने के लिए बूलगढ़ी पहुंच चुकी है। टीम के साथ एक एंबुलेंस है। टीम की अगुआई कर रहे गृह सचिव भगवान स्वरूप 7 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। अभी तक पीड़ित की मां, भाई के बयान दर्ज हो चुके हैं। शनिवार रात करीब 10 बजे एसआईटी परिवार के बीच जांच के लिए पहुंची थी, लेकिन पिता की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण बयान दर्ज नहीं हो सके थे। टीम आज पिता और अन्य रिश्तेदारों के बयान दर्ज करेगी।
क्राइम सीन पर पहुंचे नए एसपी
एसपी विनीत जायसवाल ने सुबह घटनास्थल पर क्राइम सीन किया। इसके बाद पीड़ित के गांव पहुंचे। विनीत आज पहली बार बूलगढ़ी गांव आए। मामले में लापरवाही बरते जाने पर एसपी विक्रांत वीर को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, डीएसपी और अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई थी। इधर, पीड़िता के गांव के बाहर सपा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। यहां प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगा।

सीबीआई जांच की सिफारिश की, परिजन बोले- हमें न्यायिक जांच चाहिए
सियासी संग्राम के बीच योगी सरकार ने शनिवार को हाथरस गैंगरेप मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए, लेकिन पीड़ित परिवार इस पर संतुष्ट नहीं है। पीड़ित के भाई ने कहा कि हम चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में मामले की जांच की जाए। सरकार केवल अपनी कर रही है। अभी तक की जांच से हमें संतुष्टि नहीं है। हमें हमारे सवालों के जवाब चाहिए। जिसकी बॉडी जलाई गई थी, वह किसकी थी? अगर वह शव मेरी बहन का था तो रात में इस तरह क्यों जलाया गया? डीएम ने हमारे साथ बदसलूकी क्यों की?

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