शराब लॉबी ने बढ़ाई दिक्कतें, राजस्व की खातिर सरकार ने किए प्रयोग

भोपाल । कोरोना संकट से गड़बड़ाई आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए जूझ रही राज्य सरकार की दुश्वारियां शराब लॉबी ने और बढ़ा दी हैं। शराब दुकानें बंद कर ब्लैकमेलिंग पर उतारू शराब कारोबारियों से पार पाने के लिए अब सरकार को दुकानों के ठेके आरक्षित मूल्य से 20 फीसद कम पर देने का निर्णय लेना पड़ा है। सात-सात दिन के लिए सौ से ज्यादा दुकानों के समूह के ठेके हो गए हैं।

वाणिज्यिक कर विभाग का अनुमान है कि नई व्यवस्था से तीन माह में दो हजार 800 करोड़ रुपये के राजस्व का जो नुकसान हुआ है, वह थम जाएगा। दरअसल, सरकार अब आर्थिक नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं है। यही वजह है कि बंद दुकानों को खोलने के लिए आबकारी के अमले को भी मैदान में उतारना पड़ा है। प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के बाद शराब से ही सरकार को बड़ी आमदनी कर के रूप में होती है।

कमल नाथ सरकार ने राजस्व आय बढ़ाने के लिए वर्ष 2020-21 में 25 फीसद वार्षिक शुल्क बढ़ाकर ठेके दिए थे। लॉकडाउन के कारण शराब दुकानें बंद हो गईं तो ठेकेदार और सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। सरकार ने कंटेनमेंट जोन के बाहर दुकानें खोलने की अनुमति दी पर दुकान संचालक तैयार नहीं हुए। दरअसल, ठेकेदारों का कहना था कि जिन दो माह में शराब दुकानें बंद रहीं, उसमें ठेके की आधी कीमत निकल आती है।

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