वट पूर्णिमा व्रत, पढ़िए सावित्री और यमराज की कथा, जानिए पूजा विधि

Vat Purnima Vrat 2020: भारत भर में शुक्रवार को वट पूर्णामा व्रत मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, वट वृक्ष की पूजा करती हैं। उत्तर भारत के साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में Vat Purnima Vrat प्रमुखता से मनाया जाता है। इस बार महिलाओं ने फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूजा की। माना जाता है कि वट वृक्ष की पूजा से हर मनोकामना पूर्ण होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन अपने दृढ़ संकल्प आस्था और श्रद्धा से यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। इसलिए इस दिन सुहागन महिलाएं वटवृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है।

Vat Purnima Vrat पूजन सामग्री

Vat Purnima Vrat पूजा के लिए पवित्र और साफ कपड़े से बनी माता सावित्री की मूर्ति लें। इसके साथ बांस का पंखा, वटवृक्ष की परिक्रमा के लिए लाल धागा, मिट्टी से बना कलश और दीपक, मौसमी फल जैसे आम, केला, लीची, सेव, नारंगी आदि, सिंदूर, कुमकुम और रोली और पूजा के लिए लाल वस्त्र।
Vat Purnima Vrat पूजा विधि

Vat Purnima Vrat की तैयारी के लिए सात्विक के नियमों का पालन करें। सूर्योदय के पूर्व उठ जाएं। पूजास्थल को स्वच्छ करें और जल से धोकर पवित्र करें। गंगा स्नान या स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

सोलह श्रंगार कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इस व्रत की पूजा वट वृक्ष के नीचे की जाती है। एक बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज रखें। इसको कपड़े के दो टुकड़ों से ढक दें। बांस की दूसरी टोकरी में देवी सावित्री की प्रतिमा रखें। वट वृक्ष पर जल चढ़ा कर कुमकुम, अक्षत चढ़ाएं। सूत के धागे से वट वृक्ष को बांधकर उसके सात चक्‍कर लगाएं । इसके बाद वट सावित्री की कथा सुने और चने गुड् का प्रसाद वितरित करें।

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