लोकगीत भगा रहे हैं कोरोना का डर, भोजपुरी में वायरस से बचाने के लिए भजन

नई दिल्ली। कोरोना का खौफ दुनियाभर में हवा में तैर रहा है। लोग वायरस और इसके डर को दूर करने के लिए कई तरह के उपाय कर रहे हैं। एक-दूसरे का हिम्मत बढ़ाने के लिए गीत-संगीत का भी सहारा ले रहे हैं। इटली में घरों में बंद लोगों का एक दूसरे का हौसला बंधाने के लिए गाना वायरल हो रहा है। भारत में भी कोरोना के खौफ को लोकगीतों के जरिए कम किया जा रहा है। हाल ही में सांसद रामदास आठवले का वह विडियो भी वायरल हुआ था जिसमें वह ‘गो कोरोना’ के नारे से वायरस को भागने के लिए कह रहे थे।
कोरोना वायरस के आतंक से पूरा विश्व जूझ रहा है। भारत में भी इसको लेकर चिंता बढ़ रही है। इस बीच इंटरनेट पर कई लोकगीत वायरल हो रहे हैं, जिनमें कलाकार कोरोना के डर को भगा रहे हैं। देश में रहने वाले अलग-अलग कम्युनिटी के लोग कोरोना वायरस पर लोकगीत और भजन बना रहे हैं। कोरोना पर किए जा रहे सांस्कृतिक प्रयोग को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है। इस प्रयोग को कोरोना पर ‘सांस्कृतिक वार’ के तौर पर भी देखा जा रहा है। भारत के बड़े शहरों में रहने वाले अधिकतर लोग दूर किसी गांव या कस्बे से आकर बसे हुए हैं। वे किसी क्षेत्रीय बोली और भाषा से भी वास्ता रखते हैं। ऐसे में अगर उन्हें अपनी बोली और भाषा में कोरोना से जागरूक होने का विडियो सोशल मीडिया पर दिख रहा है तो वह तुरंत उसे वायरल कर रहे हैं।
कुमाऊंनी इस तरह भगा रहे हैं कोरोना का डर
सोशल मीडिया पर कोरोना से बचाव को लेकर उत्तराखंड की कुमाऊंनी बोली में बनाया गया लोकगीत तेजी से वायरल हो रहा है। गीत की धुन उत्तराखंड की शादियों व शुभ कार्यों में गाए जाने वाले गीतों पर आधारित है। इस गीत को महिला ने ढोल के साथ प्रस्तुत किया है। उत्तराखंड कम्युनिटी को लोगों का कहना है कि कोरोना पर बने गीत को कम्युनिटी के लोग काफी उत्साह के साथ सुन रहे हैं। इस गीत के जरिए लोगों को कोरोना से न डरने की अपील की गई है।

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