रियासत पर सियासत:कांग्रेस के भूमाफिया कहने पर सिंधिया ने चुप्पी तोड़ी; बोले- हमारी तो 300 साल पुरानी रियासत है, जवाब वे दें जो नए-नए राजा बने हैं

कांग्रेस द्वारा भू-माफिया बताए जाने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कांग्रेस के बड़े नेताओं पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा- मेरी संपत्ति 300 साल पुरानी है। सवाल मैं उन लोगों से करना चाहता हूं जो नए-नए महाराज बने हुए हैं। हां, मैं एक परिवार विशेष में पैदा हुआ हूं तो क्या यह मेरी गलती है। यदि मेरी गलती है, तो मैं इसको स्वीकार करता हूं। जवाब वे दें, जो नए-नए राजा बने हैं।

कांग्रेस ने सिंधिया पर लगाए हैं गंभीर आरोप

कांग्रेस के आरोप हैं कि माहोरकर के बाड़ा पर सिंधिया परिवार के द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। इसके अधिकांश हिस्से को बेच दिया गया। जो हिस्सा बचा है, उस पर अवैध निर्माण कर किराया वसूली की जा रही है। इस संपत्ति की कीमत लगभग 360 करोड़ रुपए बताई जाती है।

आरोप- सिर्फ कब्जे के लिए कमलनाथ से मिलते थे

राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद से ही वे कांग्रेस के निशाने पर हैं। कांग्रेस सिंधिया को भू माफिया साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। बड़े नेता तक उन पर हमला कर चुके हैं। अब आरोप लगाया जा रहा है कि सिंधिया केवल जमीन के सिलसिले में कमलनाथ से मिलते थे।

कांग्रेस शासनकाल में ही मिली जमीन

तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सिंधिया एजुकेशन सोसाइटी को 146 एकड़ भूमि 99 साल के लिए 100 रुपए टोकन मनी पर लीज पर दी गई। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने सिंधिया को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि सिंधिया जब भी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलते थे, तो उनके पास ग्वालियर या इस अंचल से जुड़े कोई विकास कार्य का मुद्दा नहीं होता था।

केवल सिंधिया ट्रस्ट के नाम जमीन नामांतरण और अपने पसंदीदा अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग का मसला ही होता था। उन्होंने कहा कि जब पूर्व मंत्री कमलनाथ ने सिंधिया के जमीन नामांतरण के कार्यों को करना बंद कर दिया, तो वह अपने 22 विधायकों के साथ पार्टी से अलग हो गए।

भाजपा का पलटवार

कांग्रेस के इस हमले पर बीजेपी ने पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस को यह समीक्षा करनी चाहिए कि आखिर किस नियम के तहत उन्होंने यह जमीन सिंधिया ट्रस्ट को दी है। यदि गलत नियमों के चलते यह जमीन दी गई होगी, तो निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह की समिति इस पूरे मामले की जांच भी करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सिंधिया का काम करना बंद कर दिया तब उन्होंने सरकार को छोड़ा।

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