रिपोर्ट पॉजिटिव या निगेटिव को लेकर हंगामा:अस्पताल लिखना भूल गया कि सैंपल मृतक का है,

कोरोना काल में सिस्टम की लापरवाही का आलम देखिए….बीएचईएल से सेवानिवृत्त हुए नेतराम बरदिया की मौत शनिवार को कस्तूरबा अस्पताल में हुई थी। उनका कैंसर का इलाज चल रहा था। मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव का सैंपल लेकर कोरोना टेस्ट के लिए भेज दिया। लेकिन इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन से एक चूक भी हो गई। अस्पताल प्रबंधन यह नोट कराना ही भूल गया कि जिस व्यक्ति का सैंपल लिया गया है उसकी मौत हो चुकी है। इस वजह से सैंपल रुटीन के हिसाब से चला गया।

सोमवार को परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से शव की मांग की तो वहां से कहा-सीएमएचओ कार्यालय जाकर रिपोर्ट ले आएं। क्योंकि अस्पताल में केवल पॉजिटिव मरीजों की ही रिपोर्ट आ रही है। इस पर परिजन सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे। यहां के अधिकारियों ने परिस्थितियों को समझते हुए परिजनों से मृतक की जानकारी ली। उसके बाद उन्होंने जीएमसी से कोआर्डिनेट करके सैंपल का टेस्ट पहली प्राथमिकता से कराया। रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को शव सौंप दिया। लेकिन इस एक गलती की वजह से तीसरे दिन शव का अंतिम संस्कार हो पाया।

रिपोर्ट आने में देरी…अंतिम संस्कार को लेकर अस्पताल और परिजनों के अपने-अपने तर्क
अस्पताल प्रबंधन परिजनों काे इस शर्त पर शव साैंपने काे तैयार था कि अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक करना होगा। परिजनों का कहना था कि मौत कैंसर से हुई है, न कि कोरोना से। इसलिए शव का अंतिम संस्कार घर ले जाकर विधि विधान से करेंगे।

तब परिजनों ने ही नहीं लिया शव
कोविड गाइडलाइन के मुताबिक अस्पताल में मरने वालों का कोरोना टेस्ट लिया जाता है। उसी प्रोटोकॉल का पालन किया। यह सही है कि रिपोर्ट आने में देरी हो गई। हालांकि हमने परिजनों को कोरोना संदिग्ध मानकर पहले ही शव लेने कहा था,परंतु परिजनों ने इंकार कर दिया।
-वंदना दवे, अधीक्षक, कस्तूरबा हाॅस्पिटल

ताऊजी कोरोना पॉजीटिव नहीं थे, पता था। ऐसे में हमने उनके शव को घर ले जाने के लिए मांगा था, लेकिन प्रबंधन शव देने को तैयार नहीं था।
उमाशंकर बरदिया, मृतक का भतीजा

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