राम नाम धुन की गूंज के साथ मंदिर-मंदिर और घर-घर गाए जा रहे हैं बधाई गीत, 4 किमी दूर हो रहे भूमिपूजन को टीवी पर देखेंगे अयोध्या के लोग

अयोध्या. अयोध्या की सरयू नदी अपनी अविरल धारा से आज सुबह 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कुछ ऐसी ही उत्सुकता अयोध्या के लोगों में भूमिपूजन को लेकर है। राम नाम धुन की गूंज के साथ घर-घर बधाई गीत गाए जा रहे हैं। भूमि पूजन की शुभ घड़ी में शामिल होने के लिए पूरी अयोध्या तैयार हो गई है।

कोरोना की वजह से लोग कार्यक्रम देखने नहीं जा पा रहे हैं, लेकिन वे घर के बाहर रंगोली और छत पर केसरिया झंडा लगाकर लोग खुद की मौजूदगी दर्ज कराने में पीछे नहीं हैं। कुछ लोग केसरिया पट्टी गले में पहनकर घूम रहे हैं तो कुछ लोगों ने अपनी गाड़ियों पर झंडा लगा दिया है।
कार्य सेवक पुरम में बाहरी लोगों की एंट्री बैन

भूमिपूजन से जुड़ी जो कुछ भी तैयारियां बाकी हैं, उसे चंपत राय और बाकी लोग 1992 में बने कार्य सेवक पुरम के एक बड़े कमरे में समेटने की कोशिश कर रहे हैं। हर 2 मिनिट बाद उस कमरे के दरवाजे से कोई निकलता तो कोई उसमें जाता दिखाई दे रहा था।

गेट के बाहर दो व्यक्ति पहरेदारी कर रहे हैं, वो पहचान वालों को एंट्री दे रहे हैं, जिसको नहीं पहचान रहे थे, उनका लंबा चौड़ा परिचय पूछकर ही उन्हें जाने दिया जा रहा है। इस बड़े कमरे के अलावा बाकी 45 कमरों में सन्तों के रुकने की व्यवस्था की गई है। कुछ संत पहुंच गए तो बाकी आज शाम तक पहुंच जाएंगे। जिम्मेदारियों को लेकर चिंता कई चेहरों पर नजर आ रही है। हालांकि, सभी चेहरे मास्क से ढंके हैं।
लोगों ने रक्षा बंधन के दिन से पांच अगस्त तक का राशन-सब्जी-सामान खरीद लिया है। जन्मभूमि के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में बने 300 से ज्यादा घर के लोग कुछ घंटों के लिए अपनी चौखट तक सीमित हो जाएंगे, आखिर सवाल सुरक्षा का है। ये लोग टीवी पर ही कार्यक्रम देख पाएंगे।

राम नवमी या दीपाली पर यहां दुनियाभर से यात्री जुटते हैं, वैसा ही खास नजारा लोगों में देखने को मिल रहा हैं। रानो पाली के रहने वाले आयुष कहते हैं कि हमें भी मोदी जी के आने का इंतजार है, लेकिन दुःख है कि हम उन्हें सामने से नहीं देख पाएंगे। वह अपने गेट पर खड़े होकर ही बाहर हो रही चहल-पहल देख रहे हैं।

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