राजनीतिक रैलियों, सभाओं, धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों तक में छूट तो फिर, गरबों पर पाबंदी क्यों ?

बाजार खुल चुके हैं। धर्मस्थल खुल गए हैं। बस, ट्रेन, हवाई यातायात सब लगभग सामान्य होने जा रहे हैं। राजनीतिक, धार्मिंक और सांस्कृतिक आयोजन भी जारी हैं। ऐसे में नवरात्रि में गरबा पर पूरी तरह पाबंदी को लेकर सवाल उठ रहे है। गरबा प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं का कहना है कि भले ही बड़े पैमाने पर होने वाले गरबा महोत्सवों को अनुमति न दी जाए, लेकिन कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए प्रतिभागियों की सीमित संख्या रखते हुए परमिशन दी जानी चाहिए। गरबा प्रेमियों का तर्क है कि जिस तरह से अन्य आयोजनों में संख्या सीमित की गई है, उसी आधार पर कोविड गाइडलाइन तय कर गरबे की अनुमति भी दी जा सकती है। अन्य आयोजनों की तर्ज पर इसमें भी हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी मास्क लगाकर गरबा खेलें। गौरतलब है कि सरकार ने गरबे को छोड़कर सभी क्षेत्राें से प्रतिबंध हटा लिया है।

ताकि परंपरा बरकरार रहे
हर साल गरबा में भाग लेने वालों का कहना है कि व्यक्तिगत परिसर, हॉल, पंडाल, मंदिर परिसर आदि में छोटे आयोजनों की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि परंपरा बरकरार रहे। गरबा प्रेमी पीयूष पाठक ने कहा कि तय संख्या में जिस तरह से धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों को छूट दी गई है उसी तरह गरबे का आयोजन भी किया जा सकता है। इसके लिए भी आयोजकों के लिए गाइडलाइन दी जाए। इस संबंध में भोपाल कमिश्नर कवींद्र कियावत ने कहा कि शासन स्तर से ही गाइडलाइन बनी है। अन्य आयोजनों में लोग देर तक रुकते नहीं हैं। गरबे में देर तक रुकते हैं, इसलिए रोक लगाई है।

पांच बड़े कारण, इसलिए दी जानी चाहिए अनुमति…

चुनावी सभाओं में एकत्र हो सकते हैं असीमित लोग
सांस्कृतिक आयोजनों पर भी अब पाबंदी नहीं
मंदिर खुले और धार्मिक आयोजनों की भी अनुमति
50% क्षमता के साथ सिनेमाघर भी खुलेंगे
शादी और अन्य आयोजनों में भी शर्तों के साथ छूट
छोटे स्तर पर, सीमित संख्या में
जानकारों का कहना है कि आयोजन छोटे स्तर पर हों, सीमित संख्या में लोग आएं और गाइडलाइन के पालन के साथ अनुमति दी जाए तो संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। इसके साथ ही भीड़ न लगे और गरबे के घंटे तय कर दिए जाएं। आयोजकों के लिए जिम्मेदारी तय की जाए कि नियमों का उल्लंघन न हो। गरबा प्रेमियों ने कहा कि इसे प्रतिबंधित करना उचित नहीं है।

रोक का औचित्य नहीं…
हर साल शहर के गरबा आयोजनों में परिवार सहित शामिल होने वाले संजय मालवीय बताते हैं कि जब सभी तरह के आयोजनाें से प्रतिबंध हटा दिया गया है तो केवल गरबे पर रोक का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि गरबे में वैसे भी डिस्टेंसिंग रहती है। इसलिए तय संख्या में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इसके आयोजन होना चाहिए।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज है गरबा
विशेषज्ञों के मुताबिक गरबा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है। डॉ. धीरज शुक्ला कहते हैं कि गरबा अच्छी ब्रीदिंग एक्सरसाइज है। यह स्फूर्तिदायक है और विभिन्न अंगों के तालमेल से खेला जाता है। वैसे भी प्रतिभागी दूर-दूर होते हैं। ऐसे में अगर दूरी मेंटेन कर और मास्क लगाकर गरबा किया जाए तो इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

सीधी बात- अविनाश लवानिया कलेक्टर, भाेपाल
शासन की गाइडलाइन है, गरबा का आयोजन नहीं हो सकेगा

इस बार नवरात्रि में गरबे को लेकर क्या स्थिति रहेगी ? – शासन की गाइडलाइन के तहत गरबे का आयोजन नहीं किया जा सकेगा।
राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक आयोजन लोगों की तय संख्या पर हो सकते हैं, फिर गरबे पर ही प्रतिबंध क्यों लगाया गया है ? – इस संबंध में शासन ने ही गाइडलाइन जारी की है। सभी जगह इस पर प्रतिबंध रहेगा।
केवल गरबे पर प्रतिबंध का कोई विशेष कारण है ? – यह गाइडलाइन शासन के स्तर पर ही बनी है। लोग गरबा आयोजन में देर तक रहते हैं, ऐसे में भीड़ हो सकती है।
भीड़ तो हर आयोजन में होगी? – यह आयोजकों की जिम्मेदारी है। सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य कोविड गाइडलाइन का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।

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