रमेश ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की राय के बारे में सरकार से जवाब मांगा

नई दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को राज्यसभा में सरकार से सवाल किया कि समान नागरिक संहिता के संबंध में विधि आयोग द्वारा पेश किए गए एक परामर्श पत्र पर क्या कदम उठाए गए हैं? इस परामर्श पत्र में कहा गया है कि समान नागरिक संहिता इस मौके पर न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय। रमेश ने उच्च सदन में शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधि आयोग ने 2018 में परिवार संबंधी कानून पर एक परामर्श पत्र जारी किया था जिसमें विवाह, तलाक, बच्चों का अभिभावक सहित विभिन्न विषयों को शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि परामर्श पत्र में कहा गया है कि इस मौके पर समान नागरिक संहिता न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सरकार ने विधि आयोग की सिफारिशों पर क्या कदम उठा हैं। शून्यकाल में ही द्रमुक के एम षणमुगम ने आर्थिक मंदी के कारण आईटी और वाहन कंपनियों में अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा उठाया। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों के लिए मुआवजा दिए जाने की मांग की। कांग्रेस की विप्लव ठाकुर ने कोरोना वायरस के कारण हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर होटलों की बुकिंग रद्द होने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए होटल उद्योग और पर्यटन काफी अहम हैं। उन्होंने कहा कि होटल मालिक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने राज्य को हुए नुकसान की भरपाई के लिए विशेष पैकेज दिए जाने की मांग की। तृणमूल कांग्रेस के मानस रंजन भूइयां ने आरोप लगाया कि सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण में त्रुटि के कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। उन्होंने नए सिरे से सर्वेक्षण कराए जाने की मांग की। बीजद के अमर पटनायक ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपर्याप्त खर्च किए जाने का मुद्दा उठाया और प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य केंद्रों पर खर्च बढ़ाए जाने की मांग की।

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