महामारी हमेशा के लिए बदल देगी हमारी आदतें; भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचेंगे लोग, ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल पेमेंट अपनाएंगे

नई दिल्ली. कोरोनावायरस संकट जहां एक तरफ वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है वहीं दूसरी तरफ यह हमारी इंसानियत का इम्तिहान ले रहा है। वैसे तो इंसान एक सामाजिक प्राणी है। लेकिन इन दिनों कोरोना से बचने के लिए इंसान अब सामाजिक दूरी अपना रहा है। इस महामारी ने हमारे रहन-सहन से लेकर खाने-पीने जैसी गतिविधियों को बदलकर रख दिया है। इसके चलते जहां एक तरफ हम अपनी सदियों पुरानी परंपरा नमस्कार को फिर से अपना रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ डिजिटली एडवांस भी हो रहे हैं। कुल मिलाकर महामारी के चलते हमारी सोशल हैबिट्स में बदलाव आ रहा है।
दुनियाभर में लोग कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिलाने से बच रहे हैं और भारतीय परंपरा में दूर से नमस्कार करने की परंपरा को अपना रहे हैं ताकि संक्रमण से बचा जा सके। इजराइल के प्रधानमंत्री समेत दुनियाभर के तमाम नेताओं ने नमस्कार करने की भारतीय परंपरा को अपनाने की नसीहत दी है। बता दें कि हमारी भारतीय संस्कृति में किसी भी बड़े या आदरणीय व्यक्ति से मिलने पर दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार या प्रणाम करने की परंपरा है। हालांकि बहुत से भारतीयों का मॉर्डन/ विदेशी कल्चर के प्रति झुकाव रहा है यही वजह है कि कुछ लोग नमस्कार की बजाय हाथ मिलाने और गले मिलने में ज्यादा यकीन करने लगे थे।
सामान्य दौर में जब कोई बेचैन होता था या परेशान होता था तो उसे छूकर, थपथपाकर दिलासा दिया जाता था। मगर कोरोनावायरस के चलेत अब सामान्य नहीं रहा। यहां तक कि लोग अब किस करने से परहेज करने से लगे हैं। साथ ही सेक्स करने से भी डरते हैं। कुल मिलाकर कोरोनावायरस से हाईजीन के साथ हमारी सेक्सुअल हैबिट्स को भी बदलकर रख दिया है। बता दें कि यह दूसरा मौका है, जब सेक्सुअल हैबिट्स में बदलाव देखा गया है। इससे पहले एड्स की वजह से लोगों ने कंडोम का इस्तेमाल करना जरूरी कर दिया था।
कोरोनावायरस ने दुनियाभर की सभी कंपनियों के कर्मचारियों को वर्क फ्रॉर्म होम करने पर मजबूर कर दिया। आज लाखों-करोड़ों कर्मचारी अपने घर से काम कर रहे हैं। कंपनियों के मुताबिक, कर्मचारी घर से काम नहीं करते हैं हालांकि आज कंपनियों के इस सोच को महामारी ने बदल दी है। इन दिनों वे सभी कंपनियां घर से काम करने को तरजीह दे रही है जो कभी दफ्तर के अलावा अन्य तरीकों से काम करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। हालांकि आज घर से भी कर्मचारी सुव्यस्थित ढंग से काम कर रहे हैं। दुनिया की बड़ी एचआर (ह्यूमन रिसोर्स) फर्मों में से एक रैंडस्टैड इंडिया की चीफ़ पीपुल ऑफिसर अंजली रघुवंशी के मुताबिक, “पहले जो रोल्स पारंपरिक रूप से वर्क फ्रॉम होम नहीं होते थे, वो भी अब इस दायरे में आने लगे हैं। पहले जिन सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम नहीं था उनमें भी अब इसके लिए दरवाजे खुल रहे हैं यानी अब सेल्स वाले भी घर से काम कर रहे हैं।
वर्क फ्रॉर्म होम के दौरान जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा मिलेगा। नार्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैथियास डोएपके के मुताबिक, वर्कप्लेस में महिलाओं और पुरुषों में काम और सैलरी के मामले में हमेशा भेदभाव देखा जाता रहा है। हालांकि वर्क फ्रॉर्म होम इस फासले को भी खत्म कर सकता है। वर्क फ्रॉर्म होम जेंडर समानता को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञ के मुताबिक, वर्क कल्चर में यह नीति लंबे समय तक काम करेगी।
अब ई-शॉपिंग सिर्फ कपड़े, जूते, ज्वेलरी, घड़ी जैसे सामान तक सीमित नहीं होगा, क्योंकि लोग मजबूरी में ही सही लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग को अपना रहे है, जिसका असर आने वाले सालों में दिखेगा। मतलब आने वाले वर्षों में ऑनलाइन शॉपिंग में इजाफ दर्ज किया जा सकता है। ग्रोसरी-फूड, दूध जैसी जरूरी सामान की ऑनलाइन शाॉपिंग में भारी बढोतरी दर्ज की जाएगी। न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के मामले इजाफा होने के बाद लोग मॉल और सुपरमार्केट जैसी जगहों पर जाने से परहेज कर रहे हैं। इसके बजाए लोग ऑनलाइन के जरिए घर पर ही सामान मंगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के एक एग्जीक्यूटिव के हवाले से कहा गया है कि कोरोनावायरस के मामले बढ़ने के बाद पिछले 15 दिनों में फ्लिपकार्ट, अमेजन, बिगबास्केट और ग्रोफर्स जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 15 दिनों में जिन सामानों की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है उसमें ग्रॉसरी उत्पाद, सब्जी और घरों में रोजाना इस्तेमाल में आने वाले सामान की संख्या ज्यादा है। ऑनलाइन फूड ग्रॉसरी स्टोर बिगबास्केट के संस्थापक विपुल पारेख का कहना है कि पिछले महीने के मुकाबले इस महीने ऑर्डर की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है और हमारे पास ऑडर्स की संख्या 25 से 30 फीसदी बढ़ गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *