मध्य प्रदेश में पोषण महोत्सव शुरू:शिवराज ने कहा- कुपोषण से लड़ने के लिए पोषण सरकार बनाएंगे, जिसमें सरकार और समाज मिलकर काम करें

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को पोषण महोत्सव की शुरुआत कर दी। भोपाल के अंकुर हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिवराज ने कहा कि कुपोषण से लड़ने के लिए हम पोषण सरकार बनाएंगे, जिसमें सरकार और समाज मिलकर काम करेंगे। हर गांव में एक ‘पोषण मटका’ रखा जाएगा, जिसमें गांव का प्रत्येक परिवार थोड़ा-थोड़ा योगदान देगा तो इससे बड़ा परिवर्तन हो सकता है। इस मटके से मिलने वाले खाद्य पदार्थों और सब्जियों का उपयोग पोषण आहार बनाने में किया जाएगा।

सीएम शिवराज ने कहा कि पोषण नीति को लागू करवाने और इसका लाभ प्रत्येक कुपोषित बच्चे को मिले, इसके लिए सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें। बच्चों को सुपोषित करने के लिए आंगनबाडिय़ों के माध्यम से सरकार दूध पावडर उपलब्ध करा रही है। सुपोषित मध्यप्रदेश के लिए अभियान चलेगा। सु-पोषण हमारी प्राथमिकता है। सरकार और समाज मिलकर कुपोषण से लड़ेंगे। अगर बच्चे कमजोर होंगे, तो देश मजबूत नहीं होगा। हमें अपने बच्चों को स्वस्थ कर प्रदेश को कुपोषण से मुक्त करना है। इसलिए पोषण महोत्सव प्रारम्भ किया गया है। माताएं जागरुक हों और योजनाओं का लाभ उठाएं और बच्चों को पोषित करें।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्कूल में हुए कार्यक्रम में लाडली लक्ष्मी की 1 लाख 10 हजार लाभार्थी बेटियों के खाते में रु. 28.12 करोड़ की राशि ट्रांसफर कर दी। सीएम शिवराज ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं है, मेरी जिंदगी का मिशन है। बेटियों के साथ अन्याय होता है तो मेरा मन आक्रोश और पीड़ा से भर जाता है। आपका सम्मान, आपकी सुरक्षा, आपका स्वास्थ्य, आपका रोज़गार हमारी सरकार की प्राथमिकता है।

हम मां-बहन और बेटी के साथ खड़े हैं : सीएम
सरकार मां, बहन और बेटी के साथ खड़ी है। बेटी पैदा हो तो लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ, स्कूल जाए तो निशुल्क किताबें व यूनिफॉर्म, दूसरे गांव पढ़ने जाए तो साइकिल, छात्रवृत्ति, 12वीं कक्षा में 60% से अधिक अंक लाए तो ‘गांव की बेटी’ कहलाए, यह लाभ हम देते हैं।
हमारी योजना को अन्य राज्यों ने लागू किया
सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि यह खुशी का विषय है कि हमारी ऐतिहासिक लाडली लक्ष्मी योजना को भारत के अन्य राज्यों ने अलग-अलग नाम से अपनाया। हमारा उद्देश्य है एक ऐसे प्रदेश का निर्माण करना जहां मां-बेटियों के साथ अन्याय न हो। हमारे यहां हज़ारों वर्ष पहले कहा गया है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः] जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवताओं का वास होता है। हमने मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक निर्णय लिए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम आए हैं।

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