मध्य प्रदेश की सियासत / दिग्विजय ने शिवराज के ऑडियो पर कहा- सरकार गिराने में मोदी और शाह के शामिल होने का भंडाफोड़ करने के लिए आपका धन्यवाद

भोपाल. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कथित ऑडियो वायरल होने के बाद सियासी पारा बढ़ गया है। अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार गिराने के षड्यंत्र में मोदी और शाह भी शामिल थे, आपने (शिवराज) इसका भंडाफोड़ कर दिया। इसके लिए शिवराजजी आपका धन्यवाद। उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा- अब यह साफ हो गया है कि जब मोदीजी को कोरोना से निपटने के लिए समय देना था, तब वे मध्यप्रदेश की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को गिराने में व्यस्त थे।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान को ‘मामा’ संबोधन करते हुए कहा कि आपने स्वीकार किया कि आपके केंद्रीय नेतृत्व मोदी-शाह ने सरकार गिरवाई। अब यह भी स्वीकार कर लेते कि कमलनाथ सरकार ने रेत माफिया, बिल्डर माफिया, मिलावट करने वाले माफिया और व्यापम, ई-टेंडरिंग घोटालों पर सख्त कार्यवाई शुरू की, जिससे भाजपा घबराई हुई थी। इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सियासी हंगामे के बीच ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि, “पापियों का विनाश तो पुण्य का काम है। हमारा धर्म तो यही कहता है।” इसे मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने से जोड़ कर देखा जा रहा है।
कमलनाथ ने कहा था- उनके झूठ की पोल खुल गई है
इससे पहले बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि मै तो शुरू से ही कह रहा था कि भाजपा ने मेरी बहुमत की सरकार को साजिश-षड्यंत्र और विधायकों को प्रलोभन देकर गिराया है। उन्होंने कहा था कि अब तो इस बात की पुष्टि भी हो गई और सच्चाई भी प्रदेश की जनता के सामने आ गई कि मेरी सरकार को गिराने के लिए किस तरह की साजिश की गई और इसमें कौन- कौन शामिल था। उनके झूठ की पोल भी अब सबके सामने आ चुकी है।

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वायरल ऑडियो में शिवराज ने क्या कहा?

“केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया कि सरकार गिरनी चाहिए। यह बर्बाद कर देगी, तबाह कर देगी। और आप बताओ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुलसी भाई के बिना सरकार गिर सकती थी क्या‌? और कोई तरीका नहीं था। ये तो मंत्री वहां भी थे। मुख्यमंत्री बनने की तो नहीं सोची थी। अब कांग्रेस वाले कह रहे हैं कि गड़बड़ कर दी। घोटाला कर दिया।

मैं आज पूरे विश्वास और ईमानदारी के साथ इस मंच से कह रहा हूं, धोखा कांग्रेस ने दिया। धोखा सिंधिया और तुलसी सिलावट ने नहीं दिया। दर्द और कसक की वजह से मंत्री पद छोड़ दिया, जबकि लाेग सरपंच तक का पद नहीं छोड़ते। आज सिंधिया जी और तुलसी भाई का मैं इसलिए स्वागत करता हूं कि भाजपा की सरकार बनाने के लिए मंत्री पद छोड़कर आए। और अब हो रहे हैं चुनाव।

ईमानदारी से बताओ कि तुलसी अगर विधायक नहीं बने तो हम मुख्यमंत्री रहेंगे क्या? भाजपा की सरकार बचेगी क्या? हर भाजपा कार्यकर्ता की ड्यूटी है और कर्तव्य है कि तुलसी सिलावट चुनाव नहीं लड़ रहा, आप सब चुनाव लड़ रहे हैं। हम उम्मीदवार हैं।”

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