मतदाताओं को रिझाने के लिए:सुवासरा में मंच पर घुटनों पर बैठे मुख्यमंत्री शिवराज

मध्य प्रदेश में उपचुनाव को लेकर अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में नेताओं ने धुआंधार प्रचार अभियान शुरू कर दिया है और मतदाताओं मनाने के लिए पापड़ बेलने भी शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को ऐसा ही नजारा मंदसौर की सुवासरा सीट पर दिखाई दिया, जहां पर हरदीप सिंह डंग के समर्थन में सभा करने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंच पर घुटनों के बल बैठ गए और जनता के हाथ जोड़ लिए।

यहां पर सीएम शिवराज ने कहा कि “कांग्रेस सरकार के समय जब भी कोई विधायक, मंत्री अपने क्षेत्र के विकास की बात करते थे, कमलनाथ के पास एक ही जवाब होता था पैसे नहीं हैं। लेकिन मामा कहता है विकास के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। जो पैसे की कमी का बहाना लेकर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाए, वो नेता कैसा? नेता तो वही है जो आड़े वक्त पर लोगों के काम आए। जो मुसीबतों के बीच से रास्ता निकाल ले। मैं आपको वचन देता हूं कि विकास में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा और जनता की जरूरत के लिए कभी पैसे की कमी को आड़े नहीं आने दूंगा। लेकिन ये तब होगा, जब हमारी सरकार रहेगी।”

‘कमलनाथ जो सवा साल में नहीं कर पाई, हमने 6 महीनों में कर दिया’
सीएम शिवराज ने कहा कि ‘कमलनाथ सरकार पूरे समय पैसे की कमी का रोना रोती रही, लेकिन हमने कोरोना संकट में भी इसके लिए व्यवस्था की। यह सही बात है कि आर्थिक दिक्कत है, लेकिन हमने उसके बीच से रास्ता निकाला। कोरोना काल में भी हमने गरीबों, मजदूरों के खाते में पैसे डाले।1 लाख 78000 हितग्राहियों के खातों में सामाजिक सुरक्षा के पैसे डाले। 1400 करोड़ रुपए पेंशन के डाले। हर एक व्यक्ति को भोजन मिले इसके लिए मुफ्त अनाज की योजना तो चल ही रही है, हमने सस्ते अनाज के लिए भी 37 लाख पात्रता पर्चियां और बांटी।’
‘सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है ऐसी कलाकारी’
शिवराज ने कहा कहा कि “पार्टी के कार्यकर्ता जनता को बताएं कि कर्जमाफी के नाम पर कमलनाथ सरकार ने किस तरह किसानों को धोखा दिया है। राहुल गांधी ने मंदसौर में यह घोषणा की थी कि हमारी सरकार बनने पर सभी किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ होगा। लेकिन जब सरकार बनी, तो शर्तें लगा दीं। कहने लगे सिर्फ अल्पकालीन फसली ऋण ही माफ होगा। लाखों किसान कर्जमाफी से बाहर हो गए। फिर कहने लगे 31 मार्च 2018 तक का कर्ज माफ करेंगे, कई किसान बाहर हो गए। फिर बोले सिर्फ कालातीत ऋण ही माफ करेगे, चालू खातों का नहीं। फिर सरकार ने कर्जमाफी की रकम 6000 करोड़ में से आधा भार बैंकों, सहकारी संस्थाओं पर डाल दिया। बैंकों को पैसा दिया नहीं और कर्जमाफी के झूठे प्रमाण पत्र दे दिए। ”

शिवराज ने कहा कि यह कमलनाथ सरकार की बाजीगरी है और इस तरह की कलाकारी सिर्फ कांग्रेस कर सकती है, मामा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सरकार के इस धोखे से लाखों किसान धोखे में आ गए हैं, उनके सिर पर ब्याज की गठरी चढ़ गई है।
शिवराज जी इतना झूठ मत बोलो कि झूठ भी शर्मा जाए’
कमलनाथ ने शिवराज के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि ‘शिवराज सिंह आज केवल झूठ परोसा है। शिवराज सिंह कह रहे थे कि कमलनाथ सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया। उनका सिर्फ फसल ऋण ही माफ किया और वो भी दो लाख तक का ही कर्जा माफ किया ,एक ही खाते का माफ किया। शिवराज जी, हमने तो खाली खजाने से भी 27 लाख किसानों का कर्ज माफ किया और हमारी सरकार रहती तो जो किसान बचे थे उनका भी कर्ज माफ हो जाता।यह तो आपकी सरकार ने खुद विधानसभा में लिखित रूप में स्वीकारा है।’

कमलनाथ ने कहा कि ‘शिवराज, कितना झूठ बोलते है और कैसे दूसरों का यश अपने खाते में लेते हैं। उसका नमूना आज उनकी सभाओं में देखने को मिला। किसानों को कह रहे थे कि मैंने 6 माह में आपके खाते में 23 हज़ार करोड की राशि डाल दी। कितना बड़ा सफेद झूठ, कितना हास्यास्पद है, इसमें उन्होंने बीमा कंपनी की राशि भी जोड़ दी , प्रधानमंत्री सम्मान निधि के पैसे भी जोड़ दिए। ‘

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