भोपाल में शुरुआती बारिश में ही कोलांस लबालब, बड़ा तालाब सिर्फ सवा चार फीट खाली; जुलाई में ही खुल सकते हैं भदभदा के गेट

भोपाल. हमारे बड़े तालाब का पेट भरने वाली कोलांस नदी इस बार मानसून की शुरुआती बारिश में ही लबालब हो गई है। जून के महीने में ही यह 8 से 10 फीट पर बह रही है और लगातार इसका पानी बड़े तालाब में आ रहा है। आमतौर पर बड़े तालाब में जुलाई के दूसरे सप्ताह में पानी आना शुरू होता है। पिछले दो साल में कोलांस के संरक्षण के लिए हुए कार्यों का ही नतीजा है कि कोलांस के सहायक नालों में भी पर्याप्त पानी है और वह सीधा नदी में आ रहा है।

एक तरफ ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से इस नदी के गहरीकरण का अभियान चलाया था, दूसरी तरफ जिला पंचायत ने यहां टूटे हुए स्ट्रक्चर सुधारे और नए गेब्रियल स्ट्रक्चर आदि भी बनाए। इसके साथ ही राजस्व अमले ने नदी और नालों की जमीन पर हुए अतिक्रमण भी हटाए।

गहरीकरण किया, चैक डैम बनाए और बदल दी कोलांस की तस्वीर

कैचमेंट के 35 गांवों में खेत तालाब
जिला पंचायत ने कोलांस के कैचमेंट के 63 में से 35 गांवों में खेत तालाब बनाए। हर एक से डेढ़ किमी पर चैक डेम बनाए। नदी के भीतर रिचार्ज शाफ्ट भी बनाए गए। इस सब पर सरकारी के साथ निजी क्षेत्र के सहयोग से लगभग 12 करोड़ रुपए खर्च हुए ।
गांव के कुओं में है पर्याप्त पानी
इस बार गर्मी के मौसम में गांव के कुओं में भी पर्याप्त पानी था। मई के महीने में भी कोलांस में पानी दिखाई दे रहा था।

अक्टूबर तक तो लबालब था तालाब
पिछले साल बारिश का सिलसिला लंबा चलने का परिणाम यह था कि 7 अक्टूबर तक तो लगातार भदभदा के गेट खोलने की स्थिति बनती रही। उसके बाद भी अक्टूबर के अंत तक तालाब का जलस्तर एफटीएल पर बना रहा।

चार दिन में 0.9 फीट पानी आया
मानसूनी बारिश शुरू होने से पहले 17 जून को बड़े तालाब का जलस्तर 1661.60 फीट था, जो 20 जून को 1662.50 फीट हो गया। तालाब का फुल टैंक लेवल 1666.80 है। यानी भदभदा के गेट खुलने के लिए 4.30 फीट पानी की जरूरत है और अभी पूरा सीजन बाकी है। यदि इसी गति से पानी आता रहा तो जुलाई में ही भदभदा के गेट खुलने की स्थिति बन सकती है।

कोलांस प्रोजेक्ट तैयार, मंजूरी का इंतजार
तत्कालीन संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव की पहल पर कोलांस संरक्षण के लिए कोलांस रिवर प्रोजेक्ट बनाया गया था। इसके तहत 20 से ज्यादा छोटे तालाब व 10 चैक डैम बनाए जाएंगे। करीब एक लाख पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए करीब 50 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट को शासन की मंजूरी का इंतजार है।

तीन घंटे की मशक्कत के बाद भदभदा गेट से पकड़ा 130 किलो वजनी मगरमच्छ

भदभदा गेट पर सीढ़ियों के पास सुबह 10 बजे मगरमच्छ देखा गया। सूचना पर वन विभाग की क्रेक टीम ने इसे करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया। क्रेक टीम के ग्यारसी जाटव ने बताया कि तकरीबन 7 साल के इस मगर का वजन 130 किलो के आसपास था। इसे इसके प्राकृतिक आवास कलियासोत डैम में छोड़ दिया गया। यहां अब मगरमच्छों की संख्या बढ़कर करीब 6 है।

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