भोपाल में व्यापारी ने पत्नी के साथ किया सुसाइड

बेटी ने बताया- मम्मी ने दो चम्मच जहर खाया; पापा बोले- मैं भी पी लेता हूं

भोपाल के निशातपुरा इलाके में हार्डवेयर व्यापारी ने पत्नी के साथ कीटनाशक पीकर खुदकुशी कर ली। सुसाइड नोट नहीं मिलने से आत्महत्या की असल वजह का खुलासा नहीं हो सका है। परिवार को आशंका है कि कोरोनाकाल में बिजनेस में हुए नुकसान की वजह से दंपती तनाव में रहा होगा। पुलिस को घटनास्थल पर कीटनाशक का पैकेट मिला है।

व्यापारी की सात साल की बेटी ने बताया कि पापा दो पैकेट लेकर घर आए थे। पहले मम्मी ने खाया। फिर मैंने खाया। भाई ने उल्टी कर निकाल दी। पापा ने कोल्ड्रिंक में मिलाकर पी। मम्मी-पापा की तबियत बिगड़ने पर बच्ची आसपास के लोगों को बुलाकर लाई और अस्पताल पहुंचाया। तब तक काफी देर हो चुकी थी।

दंपती के दो बच्चे हैं
मुगालिया छाप, खजूरी में रहने वाले हेमंत पाटीदार (31) परवलिया में हार्डवेयर की दुकान चलाते थे। वह निशातपुरा के MIG-408 में प्रधान आरक्षक देवेन्द्र चौबे के मकान में पिछले आठ माह से किराए पर पत्नी बबीता (28), बेटी राबिया (7) और बेटे बबलू उर्फ भैय्यू (2) के साथ रह रहे थे।

शनिवार रात करीब 11 बजे पति-पत्नी ने कीटनाशक पीकर जान दे दी। इस दौरान उनके दोनों बच्चे घर में ही थे। हेमंत के पिता राधेश्याम पाटीदार सहकारिता विभाग में पदस्थ हैं। उनका बड़ा बेटा शैलेश उज्जैन में रहता है। शैलेष की पत्नी प्रोफेसर हैं। रविवार को हेमंत और बबीता के शव का पीएम हुआ। दोनों की शादी वर्ष 2013 में हुई थी।

व्यापारी की बेटी ने सुनाई झकझोर देने वाली कहानी बेटी राबिया ने बताया, पहले मम्मी ने दो चम्मच दवा खाई। फिर मैंने खाई थी, फिर भय्यू (बबलू) ने उल्टी कर दी थी। पापा ने कोल्ड-ड्रिंक में मिला के पी ली थी, ऐसा बोला था कि मैं भी पी लेता हूं, फिर पापा बीमार हो गए। इसके बाद चाचा आ गए। मैंने ऊपर वाले अंकल को बताया। आंटी नर्स थीं, तो वो आ गई थीं। छोटी सी डिब्बी थी, ग्रीन कलर की, भगवान वाले मंदिर में रखी थी। बेटी ने बताया कि बाजार घूमने के दौरान पापा का पेट दुखने लगा, तो हम घर वापस आ गए। वो बहुत सारी दवा-गोली लेकर आए थे। गाड़ी की पीछे वाली डिग्गी में से पापा ने दवा निकाली थी। 2 डिब्बी लेकर आए थे, ग्रीन कलर की। उसमें गोली थी, उसे चूरकर (पीसकर) मैंने आधी चम्मच खाई। मम्मी ने 2 चम्मच खाई। पापा ने पता नहीं कितनी गोलियां घोली थीं। पापा ने फोन किया कि फूफाजी (ओमप्रकाश, कुरावर) को फोन करके बोल दे, वो हॉस्पिटल लेकर चले जाएंगे। पापा ने कहा था कि किसी को बताना मत।

कोरोना काल में व्यवसाय में घाटा होने की आशंका
सुसाइड नोट नहीं मिलने से आत्महत्या की वजह का खुलासा नहीं हो सका है। हेमंत के परिवार व रिश्तेदार आपस में चर्चा करते रहे कि कोरोना काल में व्यवसाय में उसे घाटा लगा था। हो सकता है कि व्यवसाय में हुए नुकसान की वजह से उसने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा। हालांकि, रिश्तेदारों का कहना कि हेमंत का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। व्यवसाय में घाटा भी लगता तो वह घर से मदद लेकर उसकी भरपाई कर लेता। पुलिस अन्य कारणों का पता भी लगा रही है।

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