भोपाल में आवारा कुत्तों ने मासूम बच्ची को नोंचकर लहूलुहान किया, दो युवकों ने बचाकर अस्पताल पहुंचाया

भोपाल.शहर में आवारा कुत्तों का आतंक है। मंगलवार देर रात एक मासूम बच्ची पर पांच-छह आवारा कुत्तों ने हमला करके लहूलुहान कर दिया। बच्ची को कोहेफिजा के मोहम्मद अली और हनी ने बचाया। दोनों ने जख्मी हालत में बच्ची को शहर के एलबीएस अस्पताल में भेजा। यहां उसे चार-पांच टांके लगे हैं। नगर निगम प्रशासन पर एक बार फिर से सवाल उठे हैं। आवारा कुत्तों को शहर से हटाने की मुहिम कब सफलता पूर्वक अंजाम दी जाएगी।

बच्ची को बचाने वाले मोहम्मद अली ने भास्कर को बताया…
‘‘घटना न्यू डायमेंशन स्कूल के पास हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी, कोहेफिजा की है। मंगलवार रात करीब 11 बजे मैं अपने दोस्त हनी के घर पर था। तभी मुझे किसी बच्ची के चीखने की आवाज आई। मैंने घर के बाहर देखा तो एक बच्ची को घेरकर पांच-छह कुत्ते हमला कर रहे थे। मैंने उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन दो कुत्ते मुझ पर भी लपके, मैंने पास में रखी ईंटें उठा लीं और कुत्तों को मारना शुरू कर दिया। तब कुत्ते वहां से भागे। मैंने पास पहुंचकर बच्ची को उठा लिया। बच्ची की पीठ में कुत्तों के दांत लगे थे और उसका पूरा चेहरे पर खून ही खून था। बच्ची कुत्तों के हमले से मुंह के बल गिरी थी, जिससे उसकी नाक की हड्डी टूट गई थी और खून बह रहा था। इस बीच बच्ची की मां भागती हुई आईं और बेटी को इस हालत में देखकर बदहवास होकर रोने लगीं। वह अचेत होकर गिरने वाली थीं, तभी मेरे दोस्त ने उन्हें संभाल लिया। इस बीच बच्ची के पिता फहीम आ गए। वह भी बच्ची की हालत देख रोने लगे। इसके बाद फौरन गाड़ी निकाली और अस्पताल की तरफ दौड़े। इस बीच बच्ची के पिता फहीम रो रहे थे और अपने भाई को फोन लगा रहे थे। वह इतने ज्यादा बदहवास थे कि उनके हाथ कांप रहे थे। मैंने उनसे कहा कि गाड़ी आप मुझे दीजिए, मैं चलाता हूं। इसके बाद उन्हें पीछे बैठाकर मैं गाड़ी चलाकर एलबीएस अस्पताल ले गया। कोहेफिजा अस्पताल बच्ची को लेकर गए, लेकिन वहां पर डॉक्टर और स्टाफ ने कोई रिस्पाॅन्स नहीं दिया। इसके बाद हम बच्ची को उसी हालत में एलबीएस स्कूल लेकर पहुंचे, जहां पर उसका इलाज कराया गया। करीब 12.30 बजे हम लोग इलाज कराने के बाद घर लौटे। हमने कई बार नगर निगम पार्षद मनोज राठौर को फोन करके कुत्तों के आतंक के बारे में बताया और ये भी कहा कि आवारा कुत्तों को यहां से पकड़वा लिया जाए, लेकिन कभी सुनते ही नहीं हैं। दूसरा अगर सड़क पर बाइक या कार खड़ी हो तो उसे फौरन निगम वाले आएंगे और उठाकर ले जाएंगे।’’

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