प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश, हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए ‘वोकल’ बनना है

नई दिल्ली । मंगलवार, 12 मई 2020: वैश्विक महामारी कोरोना के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम को राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण से मुकाबले करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज्यादा समय बीत गया है। इस दौरान तमाम देशों को 42 लाख लोग संक्रमित हुए हैं। पौने तीन लाख से ज्यादा लोगों की दुखद मौत हुई है।

भारत में भी अनेक परिवारों ने अपने स्वजन खोए हैं। मैं सभी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया है। भारत की प्रगति में तो हमेश विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव विश्व कल्याण पर पड़ता ही है।

अपने संबोधन में उन्होंने चार अहम बातें कहीं। पहली- देश को आत्मनिर्भर बनना होगा। दूसरी- आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाएगा। तीसरी- आत्मनिर्भर बनने की राह में हमें लोकल प्रोडक्ट्स को अपनाना होगा। चौथी- लॉकडाउन का चौथा फेज आएगा, पर यह नए रंग-रूप और नए नियमों वाला होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “गरीब, श्रमिक, प्रवासी मजदूर हों, मछुआरे हों। हर तबके लिए आर्थिक पैकेज में कुछ महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया जाएगा। कोरोना ने हमें लोकल मैन्यूफैक्चरिंग, लोकल सप्लाई चेन और लोकल मार्केटिंग का भी मतलब समझा दिया है। लोकल ने ही हमारी डिमांड पूरी की है। हमें इस लोकल ने ही बचाया है। लोकल सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि हम सबकी जिम्मेदारी है।’’

मोदी ने आगे कहा, “समय ने हमें सिखाया है कि लोकल को हमें अपना जीवन मंत्र बनाना ही होगा। आपको जो आज ग्लोबल ब्रांड लगते हैं, वो भी कभी ऐसे ही लोकल थे। जब वहां के लोगों ने उनका इस्तेमाल और प्रचार शुरू किया। उनकी ब्रांडिंग की, उन पर गर्व किया तो वे प्रोडक्ट्स लोकल से ग्लोबल बन गए। इसलिए, आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है। न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है। आपके प्रयासों ने तो हर बार आपके प्रति मेरी श्रद्धा को और बढ़ाया है।’’

जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाईयां पहुंच रही हैं। स्वाभाविक है कि हर भारतीय गर्व करता है। दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है। मान जाति के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है कि आखिर कैसै। इसका जवाब भा है आत्मनिर्भर भारत का संकल्प। आज फिर भारत विकास की ओर सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहा है तब भी विश्व कल्याण की राह पर अटल है। आज हमारे पास साधन है, सामर्थ्य है. हमारे पास दुनिया के सबसे बेहतरीन टाइलेंट है। हम अपनी क्वालिटी और बेहतर करेंगे, ये हम कर सकते हैं और करेंगे।

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