पीएम की सीएम से चर्चा / मोदी ने कहा- इतनी आबादी के बावजूद भारत में कोरोना उतना नुकसान नहीं कर पाया, जितनी आफत विदेशों में आई, इसकी वजह लॉकडाउन और अनुशासन

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना के हालात को लेकर आज मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 15 मिनट संक्रमण से मौत, कोरोना से बचाव, अर्थव्यवस्था और रिफॉर्म्स जैसे कई मुद्दों पर बात की। मोदी ने कहा कि हमारी इतनी जनसंख्या होने के बावजूद भारत में कोरोना उतना विनाश नहीं दिखा पाया, जितनी दुनिया के और देशों में आफत आई। दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट लॉकडाउन और भारत के अनुशासन की चर्चा कर रहे हैं। भारत में रिकवरी रेट 50% से ऊपर चला गया है। भारत दुनिया के उन देशों में अग्रणी है, जहां संक्रमितों का जीवन बच रहा है।

मोदी के भाषण के 6 मुख्य प्वॉइंट

भारत में दुनिया में सबसे कम मौतें
हमारे लिए किसी एक भारतीय की मृत्यु भी असहज करने वाली है। भारत दुनिया के उन देशों में है जहां कोरोना से सबसे कम मौतें हो रही हैं। भारत कोरोना के इस संकट में अपने नुकसान को सीमित करते हुए आगे बढ़ सकता है। अर्थव्यवस्था को तेजी से संभाल सकता है। 2 हफ्ते के अनलॉक-1 में बड़ा सबक ये दिया है कि हम नियमों का पालन करते रहे तो कोरोना संकट से भारत को कम से कम नुकसान होगा।

सुरक्षा रखेंगे तो सुरक्षित रहेंगे
मास्क या फेस कवर पर बहुत ज्यादा जोर देना जरूरी है। बिना मास्क घर से बाहर निकलने की कल्पना करना भी अभी सही नहीं है। ये जितना खुद के लिए खतरनाक है उतना ही उसके आस-पास के लोगों के लिए। इसलिए दो गज की दूरी की बात हो, हाथ धोने की बात हो, सैनिटाइजर की बात हो, ये सभी गंभीरता से किए जाने चाहिए। घर से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ये बहुत जरूरी है।

लापरवाही लड़ाई को कमजोर करेगी
अब तक लगभग सभी ऑफिस खुल चुके हैं। प्राइवेट ऑफिस भी खुल चुके हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही, अनुशासन में कमी कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करेगा और इतने दिन की तपस्या पर पानी फिर जाएगा। हमें इस बात का ध्यान रखना है कि कोरोना को जितना रोक पाएंगे उतना ही हमारी अर्थव्यवस्था खुलेगी, दफ्तर खुलेंगे, ट्रांसपोर्ट के साधन खुलेंगे और उतने ही रोजगार के साधन बढ़ेंगे।

अर्थव्यवस्था पटरी पर आनी शुरू
आने वाले दिनों में जिस तरह से इकोनॉमी का विस्तार होगा, उससे दूसरे राज्यों को भी फायदा होगा। हमारी अर्थव्यवस्था में ग्रीन शूट दिखने लगे हैं। पावर कंजम्प्शन बढ़ने लगा है। मई में फर्टिलाइजर की सेल दोगुनी हुई है। खरीफ की बुवाई इस साल 12-13% ज्यादा हुआ है। वाहनों का प्रोडक्शन लॉकडाउन से पहले के 70% के लेवल पर पहुंच चुका है। लगातार तीन महीने में एक्सपोर्ट में कमी के बाद जून में फिर से बढ़कर पिछले साल के प्री-कोविड के स्तर पर पहुंच गया है। ये सभी हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

छोटे उद्योगों को सपोर्ट कर रहे
सभी राज्यों में फिशरीज, एमएसएमई का हिस्सा बहुत बड़ा है। इन्हें सपोर्ट करने के लिए अनेक फैसले हाल में लिए गए हैं। एमएसएमई को बैंक से क्रेडिट दिलाने का प्रयास हो रहा है। 100 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले कारोबारों को 20% अतिरिक्त क्रेडिट का लाभ दिया गया है। ट्रेड और इंडस्ट्री अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ सके, इसके लिए वैल्यू चेन पर भी मिलकर काम करना होगा। राज्यों में जहां भी स्पेसिफिक बिजनेस पॉइंट है, वहां 24 घंटे काम हो। स्थानीय स्तर पर किसी तरह की दिक्कत न हो तो इकोनोमिक एक्टिविटी और तेजी से बढ़ेगी।

रिफॉर्म्स से किसानों को फायदा होगा
जब किसान की आय बढ़ेती तो निश्चित रूप से डिमांड भी बढ़ेगी। विशेष तौर पर नॉर्थ ईस्ट और आदिवासी इलाकों में फार्मिंग और हॉर्टीकल्चर को लेकर नए अवसर आने वाले हैं। लोकल प्रोडक्ट के लिए जिस क्लस्टर बेस्ड रणनीति की घोषणा की गई है उसका लाभ हर प्रदेश को होगा।
राज्यों के साथ 3 महीने में छठी मीटिंग
कोरोना संकट पर मोदी मार्च से लगातार राज्यों से चर्चा कर रहे हैं। आज छठी बैठक है।

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