दिग्विजय ने शिवराज को लिखा तीखा पत्र, कहा- घड़ियाली आंसू मत बहाइए, मेरे साथ सांसदों को लेकर दिल्ली चलिए

दिग्विजय सिंह ने पत्र में लिखा है- जानकारी मिली है कि प्रदेश में बासमती धान का उत्पादन करने वाले किसानों के प्रति आप एकाएक बहुत चिंतित और विचलित हो रहे हैं
आपकी वेदना है कि प्रदेश के किसानों द्वारा पैदा की जा रही बासमती को अभी तक एपीडा संस्था से जीआई टैग नहीं मिल पा रहा है जीआई टैग पर पंजाब और मध्य प्रदेश के बीच मचे घमासान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को तीखा पत्र लिखा है। शिवराज को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा है कि बासमती की टैगिंग को लेकर आपने बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया। दिग्विजय ने मुख्यमंत्री से कहा है कि घड़ियाली आंसू मत बहाइए, मेरे साथ प्रदेश के सांसदों को लेकर दिल्ली चलिए, हम किसानों के हित के लिए प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देंगे। दिग्विजय सिंह ने पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी भेजी है।

दिग्विजय सिंह द्वारा शिवराज सिंह को लिखा गया पत्र

प्रिय शिवराज सिंह चौहान जी

समाचार पत्रों से जानकारी मिली है कि प्रदेश में बासमती धान का उत्पादन करने वाले किसानों के प्रति आप एकाएक बहुत चिंतित और विचलित हो रहे हैं। आपकी वेदना है कि प्रदेश के किसानों द्वारा पैदा की जा रही बासमती को अभी तक एपीडा संस्था से जीआई टैग नहीं मिल पा रहा है।

आप प्रदेश के किसानों के इतने बड़े शुभचिंतक हैं। दिसम्बर 2003 से लेकर विगत सवा साल छोड़कर करीब सोलह साल से आप की प्रदेश में सरकार है। बासमती की टैगिंग को लेकर आपने बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया। यही नहीं भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार को सातवां साल चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आप देश के लिये ईश्वर का वरदान कहते नहीं थकते। क्या कारण है कि आप अपनी ही पार्टी के नेता नरेन्द्र मोदी से मध्यप्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों को उनका हक नहीं दिला पाये। जबकि जिस बुधनी क्षेत्र से आप विगत 30 वर्षों से जनप्रतिनिधि हैं। वहां के किसानों को भी आप साल दर साल सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।

प्रदेश के धान उत्पादक किसान आपके आंसुओं को अब घड़ियाली आंसू की संज्ञा दे रहे हैं। आप प्रदेश के 14 सालों से मुख्यमंत्री हैं और अपने आप को किसानों का हमदर्द बताने में भी नहीं थकते हैं। अभी तक प्रदेश के किसानों द्वारा उत्पादित बासमती चावल ही नहीं शरबती गेहूं, ज्वार, बाजरा और कोदा-कुटकी को भी जी.आई. टैग नहीं मिल पाया है।

आपसे अनुरोध है कि प्रदेश के किसानों के हित में बासमती चावल सहित अन्य कृषि उत्पादकों की उनकी श्रेष्ठता के आधार पर जीआई टैग दिलवाए जाने हेतु आप दिल्ली चलिए और सभी सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास पर धरना दीजिये। दलीय राजनीति से हटकर मैं भी आपके धरने में शामिल होने के लिये तैयार हूं। आप यदि प्रधानमंत्री के समक्ष किसानों की मांग को लेकर धरना देने तैयार हों तो कृपया तारीख से अवगत कराने का कष्ट करें।

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