जिस रोड रेज केस में सिद्धू को 1 साल की सजा

उसे लेकर देश में कानून नहीं; जानिए ये क्या है

रोड रेज के 34 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को 1 साल की सजा सुनाई है। 1988 में पंजाब में हुई रोड रेज की एक घटना में सिद्धू के मुक्के के प्रहार से एक बुर्जुग की मौत हो गई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले सिद्धू को गैर-इरादतन हत्या से बरी कर दिया था और एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया था, लेकिन इस मामले में रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई करते हुए अब शीर्ष अदालत ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई है।

चलिए जानते हैं कि आखिर क्या होता है रोड रेज? भारत में रोड रेज को लेकर क्या है कानून? दुनिया के बाकी देशों में क्या है कानून? सिद्धू को किस मामले में हुई सजा?

रोड रोज क्या है?

रोज रेज का मतलब गाड़ी के ड्राइवर द्वारा आक्रामक, जबर्दस्ती या गुस्से से भरा व्यवहार करना है। सीधे शब्दों में कहें तो रोड रेज गाड़ी चलाते समय अचानक हुई हिंसा या गुस्सा है जो गाड़ी चलाते समय गुस्से और हताशा के कारण पैदा होती है। रोड रेज की वजह जबर्दस्ती और एग्रेसिव ड्राइविंग को माना जाता है।

रोड रेज में असभ्य व्यवहार, अपमान करना, चिल्लाना, धमकियां देना, मारपीट करना या अन्य ड्राइवरों, पैदल चलने वालों या साइकिल चालकों को डराने-धमकाने के प्रयास में खतरनाक ड्राइविंग करना आदि शामिल हैं।

रोड रेज से विवाद, संपत्ति को नुकसान, हमले और टकराव हो सकते हैं जिससे गंभीर चोट लग सकती है या मौत भी हो सकती है।

रोड रेज की घटनाओं के बढ़ने की वजह क्या है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेजी से बढ़ती आबादी, गांवों से शहरों में होने वाले विस्थापन, वाहनों की तादाद में वृद्धि, सड़कों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव व ड्राइवरों में बढ़ती इन्टॉलरेंस ये सब रोड रेज बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं। इन्टॉलरेंस का आलम यह है कि वाहन में जरा-सी टक्कर लगते ही मारपीट शुरू हो जाती है।

देश में सड़कों की लंबाई के मुकाबले गाड़ियों की बढ़ती संख्या ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। मिसाल के तौर पर दिल्ली में बीते दो दशकों के दौरान गाड़ियों की संख्या में जहां 212% की वृद्धि हुई है। वहीं सड़कों की लंबाई महज 17% बढ़ी है। इस वजह से लोगों को सड़कों पर पहले के मुकाबले ज्यादा देर तक रहना पड़ता है। इससे उनमें नाराजगी और हताशा बढ़ती है। ऐसे में अक्सर मामूली कहा-सुनी भी हिंसक झगड़ों में बदल जाती है।

भारत में क्या है रोड रेज को लेकर कानून

भारत में पिछले कुछ वर्षों से रोड रेज की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन भारतीय कानून के तहत अब भी रोड रेज दंडनीय अपराध नहीं है। हालांकि मोटर व्हीकल एक्ट में ऐसे कई सेक्शन हैं जो रोड इंजरी और रैश ड्राइविंग के मामलों से जुड़े हैं, लेकिन इस एक्ट में ऐसा कोई सेक्शन नहीं है जो रोड रेज से संबंधित है। यानी मोटर व्हीकल एक्ट में ऐसा कोई विशेष प्रावधान नहीं है, जोकि रोड रेज को दंडनीय अपराध बनाता हो। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों में रोड रेज दंडनीय अपराध है।

मार्च 2021 में एक मामले की सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट ने कहा था कि रोड रेज के बढ़ते मामलों को देखते हुए उसे दंडनीय अपराध बनाया जाना चाहिए।

परिवाहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, 2021 में देश में रोडरेज और रैश ड्राइविंग के 2.15 लाख मामले आए थे।

दुनिया के बाकी देशों में रोड रेज को लेकर क्या है कानून?

ऑस्ट्रेलिया: 5 साल तक की जेल और 54 लाख का जुर्माना

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में रोड रेज को काफी गंभीर अपराध माना जाता है। यहां पर सड़क पर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने या धमकी देने पर 5 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही 54 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है और ड्राइविंग से अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।

सिंगापुर: 2 साल की जेल

सिंगापुर में भी रोड रेज को एक गंभीर अपराध माना जाता है। रोड रेज के मामले में दोषी पाए जाने पर 2 साल की जेल या 3.88 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

ब्रिटेन: 2.5 लाख रुपए तक का जुर्माना

ब्रिटेन में पब्लिक ऑर्डर एक्ट 1986 रोड रेज के मामले में लागू होता है। रोड रेज के मामले में दोषी पाए जाने पर 10 हजार से लेकर ढाई लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

क्या है सिद्धू का रोड रेज केस?

1988 में पंजाब के पटियाला में गाड़ी पार्किंग को लेकर 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से सिद्धू का विवाद हो गया था। इस विवाद में सिद्धू ने गुरनाम सिंह पर घूंसे बरसाए थे, जिससे बाद गुरनाम की मौत हो गई थी। मृतक गुरनाम सिंह के परिजनों ने 2010 में एक चैनल के शो में सिद्धू द्वारा गुरनाम को मारने की बात स्वीकार करने की सीडी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी।

रोड रेज केस में सिद्धू के साथ कब-क्या हुआ?

रोड रेड से जुड़े मामले में सितंबर 1999 में पंजाब की निचली अदालत ने सिद्धू को बरी कर दिया था, लेकिन दिसंबर 2006 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने IPC के सेक्शन 304-II के तहत सिद्धू और एक अन्य को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई।

इस सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को गैर-इरादतन हत्या के आरोपों से बरी करते हुए IPC के सेक्शन 323 के तहत पीड़ित को चोट पहुंचाने का दोषी करार देते हुए एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरनाम सिंह के परिजनों ने रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी। अब इसी रिव्यू पिटीशन की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

AllEscort