जानिए पूजा विधि

नहाय खाए से छठ पर्व की शुरुआत हो गई है। इसके अगले दिन खरना होता है। छठ पर्व सूर्य की आराधना का पर्व है। नहाय खाए छठ पूजा का पहला दिन होता है। इस दिन नहाने और खाने की विधि की जाती है। सबसे पहले घर की साफ-सफाई की जाती है, गंगा जल से शुद्धिकरण किया जाता है। इसके बाद व्रत रखने वाले महिला शाकाहारी भोजन बनाती है। शाम को पहले परिवार की व्रत रखने वाली महिलाएं भोजन करती हैं, उसके बाद अन्य सदस्य। इस बार नहाया खाए 18 नवंबर बुधवार को है।

Nahay Khay के दिन महिलाएं पूजा पाठ करने के साथ ही छठी माता की पूजा करने का संकल्प लेती हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड उत्तर भारत के अन्य प्रदेशों में छठ पर्व का विशेष महत्व है। नहाय खाए के लिए यहां विशेष बंदोबस्त किए जाते हैं। हालांकि इस बार कोरोना महामारी के कारण अधिकांश स्थानों पर अपील की गई है कि लोग अपने घरों में ही छठ पर्व मनाएं। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से छठ माता व सूर्य देवता की आराधना करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
नहाए खाए से पहले ही छठ पूजा की पूरी तैयारी कर ली जाती है। शुरुआत होती है घर की साफ सफाई से। परंपरा के अनुसार, घर में एक स्थान पर मिट्टी का चूल्हा बनाया जाता है। छठ पूर्व के दौरान प्रसाद और पूरा भोजन वही बनता है। हालांकि आजकल बाजार में मिट्टी के रेडी टू यूज चूल्हे भी मिल रहे हैं। गेहूं को धोखर सुखाया जाता है। इस दौरान कद्दू की सब्जी बनाने का विशेष महत्व है।
छठ पर्व की पूजन सामग्री की लिस्ट

छठ पर्व के दौरान फलों का भी विशेष महत्व है। इनमें संतरा, अन्नास, गन्ना, सुथनी, केला, अमरूद, शरीफा, नारियल शामिल हैं। इनके अलावा साठी के चावल का चिउड़ा, ठेकुआ, दूध, शहद, तिल और अन्य द्रव्य भी शामिल किए जाते हैं। इनसे डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

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