गृहमंत्री मिश्रा बोले- बुजुर्गों का नेतृत्व कमलनाथ करेंगे और युवाओं का नकुलनाथ, बाकी कांग्रेस अनाथ; नकुल ने ट्वीट कर जवाब दिया

कांग्रेस सांसद नकुल नाथ का उपचुनाव में युवाओं का नेतृत्व करने के बयान पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा- कांग्रेस एक अजीब दौर से गुजर रही है। अब कांग्रेस में युवाओं का नेतृत्व नकुल नाथ करेंगे। बुजुर्गों का नेतृत्व कमलनाथ करेंगे। बाकी कांग्रेस अनाथ की तरह है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व को चाहिए कि विधायकों के साथ बैठकर कभी-कभार बातचीत कर लिया करें। सोमवार को मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का हाल जानने चिरायु अस्पताल भी गए। गृहमंत्री के बयान का नकुल नाथ ने ट्वीट कर जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि अनाथ को नाथ चाहिए, कमल नहीं, कमलनाथ चाहिए।
गृहमंत्री ने कहा कि वे आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र लाने की मांग कर रहे हैं। हम ऐसा क्यों करें। कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल में कहती थी कि खजाना खाली मिला है। इसलिए श्वेतपत्र लाने का सवाल ही नहीं उठता। गृहमंत्री ने कहा कि चंबल एक्सप्रेस वे का शिलान्यास प्रधानमंत्री से कराए जाने की योजना है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर तय करेंगे कि शिलान्यास कब हो।

चंबल प्रोग्रेस-वे का भूमिपूजन प्रधानमंत्री मोदी के हाथों अगले महीने

प्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के पहले राज्य सरकार चंबल प्रोग्रेस-वे का काम शुरू करेगी। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भूमिपूजन अगले महीने 15 अगस्त के आसपास कराने की तैयारी है। पीएमओ से हरी झंडी मिलते ही तारीख तय होगी। ये संभव है कि डिजिटलाइज़्ड भूमिपूजन किया जाएगा। राज्य सरकार चंबल एक्सप्रेस वे को ही चंबल प्रोग्रेस-वे के नाम से लाने का फैसला कर चुकी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों कहा था कि भूमि का अधिग्रहण होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भूमिपूजन करने आएंगे।

कांग्रेस ने की थी श्वेतपत्र जारी करने की मांग

कांग्रेस ने बजट में पिछले साल की तुलना में 28 हजार करोड़ रुपए की कटौती किए जाने पर राज्य सरकार से प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत ने कहा कि सरकार ने लेखानुदान के समय जो 40 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई थी, वो आंकड़ों की हेराफेरी थी। उन्होंने कहा कि एफआरबीएम की ऋण लेने की सीमा बढ़ जाने के बावजूद भी बजट घट गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र जो इस समय सामुदायिक चिंता का विषय है। इन क्षेत्रों में बजट की कमी दर्शाती है कि सरकार हताश है और आगे का रास्ता उसे सूझ नहीं रहा है।

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