क्योंकि इतना प्यार ‘उनसे’ करती थी वो…

पति के लिए नौकरी में सीनियरिटी छोड़ी, नापसंद डॉग्स पाले, इतनी समर्पित थी भोपाल की प्रोफेसर

भोपाल में तीन दिन पहले डॉक्टर पराग पाठक की ब्रेन हेमरेज से मौत के बाद उनकी पत्नी प्रीति झारिया ने भदभदा ब्रिज से कूदकर जान दे दी। वह अपने पति से बेइंतहा प्यार करती थीं। दैनिक भास्कर ने इस कपल की जिंदगी को लेकर परिचितों से बात की। डॉक्टर पराग की मुंह बोली बहन अमिता जैन से जानिए पराग और प्रीति की मोहब्बत की दास्तां…

प्रीति जबलपुर की रहने वाली थी। 4 साल पहले ही पराग और प्रीति की शादी हुई थी। पराग की यह दूसरी शादी थी और प्रीति की पहली। दोनों के बीच इतना प्रेम, लगाव, सम्मान था कि रिश्तेदार, जानने वाले भी उनकी कहानी सुनाते-सुनाते नहीं थकते। प्रीति और पराग में गजब की अंडरस्टैंडिंग थीं। दोनों एक-दूसरे की बात को बखूबी समझते थे। यही नहीं पराग भी प्रीति और उनके परिवार वालों का उतना ही सम्मान करते थे। उनके प्रति अपने सारे फर्ज निभाते थे।

शादी के कुछ महीनों तक प्रीति जबलपुर में रहकर जॉब करती रही। वो जबलपुर के शासकीय मानकुंवर बाई कला एवं वाणिज्य स्वशासी महिला महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर थी। ससुराल आने का समय कम मिलता था। जब उसे लगा कि कब तक नौकरी के लिए अपनों से दूर रहूंगी, उसने बिल्कुल देरी नहीं की और भोपाल के शासकीय नरेला कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर ट्रांसफर ले लिया। कह सकते हैं कि सीनियरिटी छोड़ दी।

पराग को डॉग्स बहुत पसंद थे, लेकिन प्रीति को नहीं। इसके बावजूद उसने पराग के लिए घर में डॉग्स रखने की हामी भरी और लगभग 6-7 महीने पहले उसे 2 डॉग्स भी गिफ्ट किए। इतना ही नहीं दिसंबर में पति के जन्मदिन पर प्रीति ने एक लग्जरी कार भी गिफ्ट की।

पराग को बीपी की शिकायत थी। इसलिए उनके लो-कैलोरी फूड, ग्रीन टी सब का ख्याल प्रीति खुद रखती। पिछले 5-6 दिनों में पराग से मिलने जितने भी लोग हॉस्पिटल पहुंचे, प्रीति ने लगभग सभी से बस एक ही बात कही, इनके लिए दुआ करना कि जल्दी ठीक हो जाएं। अगर ये नहीं रहेंगे तो हम भी इनके बिना नहीं रह पाएंगे।

 

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