कैंसरग्रस्त बेटी के इलाज के साथ लोगों की सेवा

भोपाल में आर्मी ऑफिसर की नर्स पत्नी के समर्पण की कहानी’

आज विश्व नर्स दिवस है। अस्पतालों में मरीजों के इलाज में डॉक्टर के बाद नर्सिंग स्टाफ का रोल महत्वपूर्ण होता है। प्रदेश में महिलाओं के सबसे बड़े अस्पताल ‘’सुल्तानिया लेडी हॉस्पिटल‘’ में एक ऐसी नर्स सेवाएं दे रही है, जिसके संघर्ष की कहानी अस्पताल में हर किसी की जुबां पर है। डेढ़ साल पहले उनकी बेटी को जांच में हड्‌डी का कैंसर बताया था। बेटी के बीमार होने के बाद भी उन्होंने अस्पताल में ड्यूटी करना नहीं छोड़ा। वे दिन में बेटी की कोमोथेरेपी कराती और रोस्टर के अनुसार रात में ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी करती। आखिरकार बेटी चल बसी। सेना में आर्मी ऑफिसर की नर्स पत्नी के संघर्ष की कहानी..

‘मेरी मौसी स्टाफ नर्स थीं, उन्हें देखकर मैंने नर्सिंग का कोर्स किया। 2008 में पोस्टिंग सुल्तानिया अस्पताल में हुई थी। पति आर्मी में जेसीओ हैं। मरीजों की सेवा करने की जिद बचपन से मेरे मन में थी। सुल्तानिया हॉस्पिटल में अधिकांश गरीब परिवारों की महिलाएं गंभीर अवस्था में आती हैं। मेरी ड्यूटी अक्सर ऑपरेशन थिएटर में रहती है। रोस्टर के अनुसार दिन-रात में ड्यूटी लगती रहती है। जीवन खुशनुमा गुजर रहा था कि दो साल पहले बड़ी बेटी की तबीयत खराब रहने लगी। डॉक्टरों को दिखाया तो अप्रैल 2020 में हड्‌डी का गंभीर कैंसर मिला। इसके बाद अजीब स्थिति बन गई। अचानक आई परेशानी के बाद मेँने खुद को संभाला। फैसला किया कि में अपनी बेटी की देखभाल भी करूंगी। अस्पताल में भी फर्ज निभाउंगी। मैं बेटी की कीमोथेरेपी कराने के लिए दिन में छुट्टी लेती थी और रात में ड्यूटी पर आ जाती। मेरे सामने ऑपरेशन थिएटर में गंभीर अवस्था में आई गर्भवती महिलाओं को देखकर लगता कि इन्हें भी मेरी जरूरत है। ऐसे बेटी की देखभाल करते हुए करीब सवा साल का समय गुजर गया, लेकिन जून 2021 में बेटी की हालत बिगड़ने लगी। नौ दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उसकी डेथ हो गई। बेटी बी-कॉम करके एमबीए करना चाहती थी। बीमारी ने उसे छीन लिया, लेकिन अब सोचती हूं कि अस्पताल में आने वाली बेटियों और महिलाओं का इलाज और सेवा करके सोचती हूं, ये भी मेरी बेटी के जैसी हैं। एक बेटी ईश्वर ने छीन ली। मेरी कोशिश रहती है कि अस्पताल में महिलाओं की जान बचा सकूं।

(जैसा कि सुल्तानिया अस्पताल की नर्स लीना वर्गीस ने दैनिक भास्कर को बताया)

आर्मी में अफसर पति देते रहे हिम्मत

लीना के पति वर्गीस आर्मी में जूनियर कमांडिंग ऑफिसर (JCO) हैं। उनकी सिक्किम में पोस्टिंग है, बड़ी बेटी के कैंसर ग्रस्त होने के दौरान वे भोपाल आकर इलाज कराने ले जाते, लेकिन ड्यूटी के कारण उन्हें कम समय मिलता था। लीना को फोन पर वे हिम्मत देते रहे। लीना के परिवार में उनकी मां और एक और छोटी बेटी है वह 12वीं में पढ़ रही है।

लीना के दर्द को बयां करते भर आई आंखें

स्टाफनर्स लीना के संघर्षमय जीवन और अस्पताल में उनके समर्पण के बारे में बताते हुए सुल्तानिया अस्पताल की मेट्रन कामिनी जोसेफ की आंखें भर आई। कामिनी ने बताया कि बेटी को कैंसर होने के बावजूद लीना ने लंबी छुट्टी नहीं मांगी। सिर्फ जिस दिन कीमोथेरेपी होती, वे उस दिन की छुट्‌टी लेकर उसका कीमो कराती और शेड्यूल के अनुसार ड्‌यूटी पर आकर काम करती थीं। लीना ऑपरेशन थिएटर में क्रिटिकल केयर यूनिट की कुशल स्टाफनर्स हैं।

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