किसान भाइयों को दीदी का साथ:ममता ने किसान नेताओं से फोन पर बात की; आंदोलन के समर्थन में पंजाबी लेखकों ने अवॉर्ड लौटाए

दिल्ली कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का शुक्रवार को 9वां दिन है। किसान कल होने वाली बैठक के लिए आज रणनीति तैयार कर रहे हैं। किसान भाइयों को आज दीदी यानी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का भी साथ मिल गया है। ममता बनर्जी ने कई किसान नेताओं से फोन पर बात की है और उनसे कहा कि केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आपके आंदोलन में तृणमूल पूरी तरह साथ है।

किसानों के सपोर्ट में अवॉर्ड वापसी का सिलसिला दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। लेखक डॉ. मोहनजीत, चिंतक डॉ. जसविंदर और पत्रकार स्वराजबीर ने अपने साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिए हैं। गुरुवार को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्मविभूषण अवॉर्ड लौटा दिया था। उनके अलावा राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने अपना पद्मश्री वापस करने का ऐलान किया था।

केंद्र सुधारों पर राजी, पर किसान नहीं

किसानों और केंद्र के बीच एक दिन पहले यानी गुरुवार को हुई बातचीत में साफ हो गया था कि आंदोलन अभी थमेगा नहीं। क्रांतिकारी किसान यूनियन के लीडर दर्शनपाल ने आज कहा कि केंद्र कानूनों में कुछ सुधार पर राजी है, पर हम नहीं। हमने उन्हें बता दिया है कि पूरे कानून में ही खामी है। हम कल होने वाली मीटिंग से पहले आज आपस में बातचीत करेंगे और अपनी रणनीति तैयार करेंगे। संगठनों के बीच बैठक हो रही है।

दिल्ली बॉर्डर पर 9 प्वाइंट बंद, किसान लगातार जमा रहे

आंदोलन के चलते दिल्ली बॉर्डर पर 9 प्वाइंट पर ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। कुछ वैकल्पिक रास्ते दिल्ली में जाने के लिए हैं, लेकिन इन पर भी ट्रैफिक की स्थिति खराब है। हरियाणा और पंजाब के किसान लगातार बॉर्डर पर जमा हो रहे हैं। आज रात सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर हजारों युवा जमा होंगे। इनका जत्था गांवों से रवाना हो गया है। नौजवान भारत सभा ने बताया कि मोगा, फरीदकोट, मुक्तसर, जालंधर, अमृतसर, गुरदासपुर, नवानशहर, रोपड़, संगरूर और पटियाला से युवा बॉर्डर पर आ रहे हैं।
केंद्र बोला- MSP रहेगी, किसान बोले- मुद्दा कानून का है

केंद्र और किसानों के बीच चौथे दौर की बातचीत करीब 7 घंटे चली। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को भरोसा दिलाया कि मिनिमम सपोर्ट प्राइज (MSP) को छुआ नहीं जाएगा। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। एक्ट के प्रावधानों में किसानों को सुरक्षा दी गई है। उनकी जमीन की लिखा-पढ़ी कोई नहीं कर सकता ।

किसानों ने कहा- मसला इकलौते MSP का नहीं, बल्कि कानून पूरी तरह वापस लेने का है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केवल एक नहीं, बल्कि कई मसलों पर बातचीत होनी चाहिए। केंद्र और किसानों के बीच अब पांचवें दौर की बातचीत 5 दिसंबर को होगी।

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