उपचुनाव की घोषणा से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता नाराज, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे दीपक जोशी ने दोहराया अभी भी खुले हैं विकल्प

भोपाल. मध्य प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए राजनैतिक दलों ने तैयारियों तेज कर दी हैं। हालांकि, अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। लॉकडाउन में ढील मिलते ही नेताओं के दौरे शुरू हो गए हैं। कांग्रेस को उम्मीदवारों की तलाश है तो भाजपा में माना जा रहा है कि कमलनाथ सरकार के पतन का कारण बने 22 पूर्व विधायकों को ही मैदान में उतारा जाएगा। कांग्रेस छोड़कर आए इन नेताओं को असली चुनौती भाजपा से 2018 में चुनाव लड़ चुके नेताओं से ही है। भाजपा में पेंच इसी बात को लेकर फंस गया है। कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र और भाजपा नेता दीपक जोशी ने एक बार फिर दोहराया है कि उनके विकल्प खुले हुए हैं।

विधानसभा उपचुनाव वाली 24 में से 17 सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले इलाके से हैं। भले ही 2018 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी यहां से जीत दर्ज नहीं कर सके हों लेकिन ग्वालियर-चंबल संभाग भाजपा का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस से आए पूर्व विधायकों को यहां से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सबसे ज्यादा भितरघात का खतरा बढ़ गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया सबसे ज्यादा नाराज बताए जा रहे हैं। इसकी वजह भी है। जयभान ने अपनी रातनीतिक पारी की शुरुआत ही सिंधिया राजघराने के विरोध पर की थी। ग्वालियर के ही वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा भी पार्टी से नाराज बताए जा रहे हैं। पिछले चुनाव में अनूप को भितरवार से हार का मुंह देखना पड़ा था।

ग्वालियर-चंबल संभाग में वरिष्ठ नेताओं में बढ़ रहे असंतोष के कारण भाजपा नेताओं की सांसें फूली हुई हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेताओं को मनाने का जिम्मा स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सौंपा है। उन्होंने नाराज नेताओं से रविवार को ग्वालियर में उनके घर पहुंचकर मुलाकात की थी। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी और वरिष्ठ नेता डॉ. गौरीशंकर शेजवार भी पार्टी के फैसले से खुश नहीं हैं। डॉ. गौरीशंकर को मनाने का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने लिया है। शेजवार के बेटे मुदित 2018 के चुनाव में कांग्रेस के डॉ. प्रभुराम चौधरी से चुनाव हारे थे। अब चौधरी को जितवाने के लिए शेजवार को तैयार करना है।

दीपक जोशी ने दोहराया अभी भी खुले हैं विकल्प

वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक जोशी ने फिर दोहराया है कि उनके लिए सभी विकल्प खुले हैं। क्योंकि जिन्होंने मुझे चुनाव हराया, उनकी पीठ थपथपाई जा रही है। मैं पराक्रम करने वाला नेता हूं, परिक्रमा करने वाला नहीं। अपने कार्यकर्ता के लिए तो लड़ना पड़ेगा। यह नैतिक जिम्मेदारी भी है। सोमवार को जोशी का यह बयान तब सामने आया है, जब एक दिन पहले ही भाजपा ने उन्हें चुनाव संचालन समिति में जगह दी है।
पहले भी जोशी विकल्प खुले रखने की बात कह चुके हैं। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री सुहास भगत, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी उनसे बात कर चुके हैं। बताया गया है कि स्थानीय स्तर पर चुनाव को लेकर कुछ जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं, इससे कई कार्यकर्ता खफा हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने 2018 के चुनाव में जोशी के विरुद्ध भितरघात किया था।
जोशी ने ‘भास्कर’ से चर्चा में कहा कि वे चुनाव नहीं हारे, उन्हें हराया गया। वहीं, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि उपचुनाव में कांग्रेस को सांस भी नहीं लेने देंगे। लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में मूल कार्यकर्ता जो वर्षों से संघर्ष करता रहा, उसका आत्मसम्मान भी रहना चाहिए। यह चिंता पार्टी करे। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी पुरानी सरकार के प्रभाव से अभी भी बाहर नहीं निकले हैं। उन्हें यह भ्रम मिटाना चाहिए। अब भाजपा की सरकार है।

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