आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी का विरोध, सोलंकी बोले-बायोडाटा में छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया में किया वायरल

निवाली/बड़वानी. भाजपा द्वारा मप्र से राज्यसभा के प्रत्याशी बनाए गए डॉक्टर सुमेरसिंह सोलंकी के बायोडाटा में आदिवासी संगठनों को नकारात्मक व अराष्ट्रवादी बताए जाने पर बवाल मचा हुआ है। मालवा-निमाड़ के अनेक क्षेत्रों में आदिवासी समाज के लोगों द्वारा सोलंकी का पुतला जलाया जा रहा है। अनेक आदिवासी संगठनों द्वारा इस मामले में सोलंकी पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। वहीं मामले के तूल पकड़ने पर सोलंकी ने कहा कि उनके बायोडाटा में छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है।
बड़वानी के निवाली में आदिवासी समाज के लोगों ने डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी का पुतला फूंककर विरोध जताया। समाज के लोगों ने बताया डॉ. सोलंकी ने अपने बायोडाटा में आदिवासी समाज संगठनों को लेकर, जो टिप्पणी की है वह आपत्तिजनक है। इसके विरोध में आदिवासी समाज संगठनों ने बस स्टैंड चौराहे पर पुतला दहन किया। साथ ही पुलिस को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।
आदिवासी समाज संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया निवाली में हाट-बाजार के दिन आदिवासी मुक्ति संगठन और जयस के संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाजपा द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किए डॉ. सोलंकी का पुतला दहन किया। उन्होंने बताया सामाजिक स्तर पर उन्होंने भ्रमित कर जानकारियां भेजी है, जो समाज को ठेस पहुंचा रही है।
गलती से भी समाज के लिए गलत नहीं कहा- डॉ. सोलंकी
वहीं मामले में डाॅ. सोलंकी का कहना है कि मेरे बायोडाटा के साथ छेड़छाड़ की गई है। सोशल मीडिया में वायरल किया बायोडाटा 6 पेज का है। जबकि मेरा बायोडाटा 5 पेज का है। वायरल बायोडाटा में पेज नंबर 2 अलग से जोड़ा गया है। मेरे द्वारा तैयार कराए गए बायोडाटा में उपलब्धियों को पीले रंग की पट्टी से हाईलाइट किया गया है। जबकि वायरल बायोडाटा में लाल रंग से लिखा गया है। मैंने अब तक कभी भी गलती से भी समाज के खिलाफ गलत नहीं बोला है। मेरे खिलाफ साजिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि उनकी जन्म तारीख 1 मई 1972 है। जबकि सोशल मीडिया में वायरल बायोडाटा में जन्म तारीख 1 मई 1975 दर्शाई गई है। इसको लेकर जरुरत पड़ने पर सायबर सेल में शिकायत कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करूंगा।

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