अब नए शहर में तेजी से बढ़ रहा संक्रमण :चार दिन में हबीबगंज में 42, शाहपुरा में 27 व कोलार में 18 कोरोना पॉजिटिव मरीज बढ़े

भोपाल, अब नए शहर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 4 दिनों में हबीबगंज में 42, शाहपुरा में 27 व कोलार में 18 मरीज बढ़े हैं। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कहा है कि जहां संक्रमण व लापरवाही बढ़ रही है, वहां विशेष लॉकडाउन किया जाएगा।

शाहपुरा : 3 दिन में बढ़े 21 मरीज
शाहपुरा थाना क्षेत्र में 14 जुलाई को महज 6 एक्टिव केस थे, जो अब बढ़कर 27 पर पहुंच गए हैं। यहां बावड़ियाकलां समेत शाहपुरा ए सेक्टर, रोहित नगर, ग्रीन हाईट्स, सहयोग विहार, आकृति ईको सिटी और फ्लेमिंगो समेत अन्य इलाकों में भी लगातार मरीज सामने आ रहे हैं।

हबीबगंज : सबसे ज्यादा 66 केस
हबीबगंज क्षेत्र में दो हफ्ते से लगातार कोरोना मरीज मिल रहे हैं। यहां सबसे ज्यादा 66 एक्टिव केस हैं। अरेरा कॉलोनी में अब तक 100 से ज्यादा पॉजिटिव मिल चुके हैं। क्षेत्र में कंटेनमेंट एरिया की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। यहां ई-4-5, 1100 क्वार्टर, मीरा नगर, चार इमली, शिवाजी नगर में मरीज मिल रहे हैं।

कोलार : 38 एक्टिव केस, एक मरीज की मौत
कोलार थाना क्षेत्र में संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यहां 13 जुलाई को एक्टिव कोरोना मरीजों की संख्या 20 थी, जो अब बढ़कर 38 पर पहुंच गई है। पिछले चार दिनों में यहां 18 नए पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। यहां एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। दानिशकुंज, सर्वधर्म, ललितानगर, प्रियंका नगर, सिग्नेचर रेसीडेंसी और धौली खदान इलाके में पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं।
पुलिस परिवारों को किराए से मकान नहीं दे रहे लोग

गोविंदपुरा स्थित नवीन पुलिस आवासीय परिसर में पुलिसकर्मियों को आवंटित अस्थाई आवास खाली करने का फरमान पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी हुआ है। कोरोना संक्रमण के चलते इन्हें जहांगीराबाद इलाके से यहां शिफ्ट किया गया था। इस फरमान के बाद यहां रह रहे पुलिस परिवार परेशान हो रहे हैं। वे यहां निवास की अवधि 6 महीने बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अपनी इस मांग को लेकर पुलिस कर्मियों के परिजनों ने गृहमंत्री के निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि संक्रमण के कारण पुलिस वालों को कोई किराए से मकान देने को तैयार नहीं है। इस कठिन समय में परिवार के छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर वे कहां जाएंगे। उनके मुखिया यानी पुलिसकर्मी को इतना वेतन नहीं मिलता है कि वे पाॅश इलाके में किराए का मकान लेकर रह सकें।

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