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मंत्री का गैरजिम्मेदाराना बयान:संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर बोलीं- हनुमान चालीसा का पाठ करती हूं, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

बिना मास्क सदन पहुंचे कई मंत्री-विधायक

भोपाल और इंदौर में कोराना एक बार फिर फैलने लगा है। सख्ती शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं लेकिन, मंत्री-विधायकों को इसकी परवाह नहीं है। विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार 23 फरवरी को कई विधायक और मंत्री बिना मास्क लगाए पहुंच गए। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ऊषा ठाकुर भी बिना मास्क के विधानसभा पहुंची थीं।

जब ठाकुर को बताया गया कि मुख्यमंत्री ने कोरोना से बचाव की सावधानी बरतने की अपील की है, तो उन्होंने कहा, ‘मैं हनुमान चालीसा का पाठ करती हूं। प्रतिदिन शंख बजाती हूं। काढ़ा पीती हूं। गाय के गोबर के कंडे पर हवन करती हूं। इससे रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है। यह मेरा कोरोना से बचाव है। गमछा गले मे रखती हूं अगर कोई पास आये तो मुंह पर रख लेती हूं।’

उन्होंने आगे कहा कि वेदों को 10 हजार साल पूरे हो रहे हैं। दुनिया में जिसे श्रेष्ठतम तरीके से जीना है, वह वैदिक जीवन पद्धति अपनाए। उसे कोई तकलीफ छूकर भी नहीं पाएगी।

वहीं, विधायक रामबाई ने कहा, ‘जिसके पास हिम्मत होती है, वही कुछ कर सकता है। मास्क नहीं लगाने पर जो जुर्माना होगा, वह मैं दे दूंगी लेकिन, मास्क नहीं लगाऊंगी। मुझे घबराहट होती है।’

इंदौर में चाट-पकौडी खाने से बढ़े केस
इंदौर में लगातार कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। इसके जवाब में मंत्री ऊषा ठाकुर ने कहा कि लोग सड़कों पर चाट पकौड़ी खाने आ रहे। बेवजह सड़कों पर आते-जाते हैं, तभी मामले बढ़े हैं।

बता दें कि इंदौर में सोमवार को कोरोना के 102 नए केस सामने आए हैं। यहां संक्रमितों की कुल संख्या 57 हजार पहुंच गई है।

इधर, सीएम की अपील – कोरोना से बचाव के लिए सतर्कता बरतें
मुंख्ममंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोरोना फिर से पैर न पसारे, इसके लिए हम सभी को सजग रहना है। इंदौर और भोपाल में कुछ पॉजिटिव प्रकरण आने के बाद यह सावधानी बहुत आवश्यक हो गई है। शासन ने मेलों में विशेष रूप से सतर्कता बरतने के निर्देश भी जारी किए हैं।

कोरोना के चलते स्थगित हुआ था शीतकालीन सत्र
विधानसभा का शीतकालीन सत्र 28 से 30 दिसंबर 2020 को आहूत किया गया था, लेकिन कोरोना के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कोराना के फर्जी आंकड़े सर्वदलीय बैठक में देने का आरोप स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर लगाया था। सत्र से पहले विधानसभा विश्रामगृह के कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट कराया गया था। इसमें करीब 35 कर्मचारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव बताई गई थी।

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