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अमेरिका में बवाल LIVE:जो बाइडेन की जीत पर कांग्रेस की मुहर; ट्रम्प ने मानी हार, बोले- 20 जनवरी को सत्ता सौंप दूंगा

अमेरिका में हिंसा के बीच कांग्रेस ने प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगा दी है। यूएस कांग्रेस के जॉइंट सेशन में वाइस प्रेसिडेंट इलेक्ट कमला हैरिस की जीत को भी मंजूरी दी। कांग्रेस की मंजूरी के बाद बाइडेन आधिकारिक तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे, तो कमला हैरिस उपराष्ट्रपति। इस फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा- 20 जनवरी को कानून के मुताबिक जो बाइडेन को पॉवर ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

इससे पहले, 3 नवंबर को आए नतीजों में डेमोक्रेट्स ने बढ़त हासिल की थी। वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने जुटी तो अमेरिकी लोकतंत्र शर्मसार हो गया। ट्रम्प के समर्थक दंगाइयों में तब्दील हो गए। संसद में घुसे। तोड़फोड़ और हिंसा की। CNN के मुताबिक, संसद के बाहर और अंदर हिंसा में चार लोग मारे गए। मिलिट्री की स्पेशल यूनिट ने दंगाइयों को खदेड़ा। कई घंटे बाद संसद की कार्यवाही फिर शुरू हुई। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटि्व्स (HOR) की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा- हम बिना डरे अपना काम जारी रखेंगे।

दरअसल, अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव के बाद जिस बात का डर था, वही हुआ। हिंसा की आशंका थी और ये हुई भी। 3 नवंबर को ही यह तय हो गया था कि जो बाइडेन दुनिया के सबसे ताकतवर देश के अगले राष्ट्रपति होंगे। जिद्दी डोनाल्ड ट्रम्प फिर भी हार मानने को तैयार नहीं थे। चुनावी धांधली के आरोप लगाकर जनमत को नकारते रहे। हिंसा की धमकियां भी दीं। यहां हम आपको इस घटना से जुड़े अपडेट्स दे रहे हैं….

पहले पूरा विवाद संक्षेप में समझिए
3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव हुआ। बाइडेन को 306 और ट्रम्प को 232 वोट मिले। सब साफ होने के बावजूद ट्रम्प ने हार नहीं कबूली। उनका आरोप है कि वोटिंग के दौरान और फिर काउंटिंग में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। कई राज्यों में केस दर्ज कराए। ज्यादातर में ट्रम्प समर्थकों की अपील खारिज हो गई। दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। चुनाव प्रचार के दौरान और बाद में ट्रम्प इशारों में हिंसा की धमकी देते रहे हैं। बुधवार को हुई हिंसा ने साबित कर दिया कि सुरक्षा एजेंसियां ट्रम्प समर्थकों के प्लान को समझने में नाकाम रहीं।

4 लोगों की मौत
अमेरिकी संसद के बाहर और अंदर हिंसा में चार लोगों के मारे जाने की खबर है। वॉशिंगटन डीसी के पुलिस चीफ रॉबर्ट कॉन्टे ने कहा- मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तीन लोगों की मौत हुई है। इनमें एक महिला और दो पुरुष हैं। हम मामले की जांच कर रहे हैं। जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी मौत की पुष्टि नहीं की। न्यूज एजेंसी ने मरने वालों की संख्या चार बताई है।

पेंस भी ट्रम्प से नाराज
ट्रम्प की पार्टी के एक सांसद ने CNN से कहा- बुधवार की घटना के बाद ट्रम्प ने वाइस प्रेसिडेंट माइक पेंस की आलोचना की थी। इसके बाद से पेंस दुखी और नाराज हैं। उन्होंने ट्रम्प के रवैये को गलत बताया है।

मोदी फिक्रमंद
अमेरिका में पैदा हुए हालात पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिंता जाहिर की। मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा- वॉशिंगटन डीसी में हुई हिंसा और दंगा-फसाद से चिंतित हूं। सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण और तय प्रक्रिया के मुताबिक होना चाहिए। लोकतांत्रिक तरीकों पर गैरकानूनी प्रदर्शनों का असर नहीं पड़ना चाहिए।
संसद में भी पिछड़े ट्रम्प

एरिजोना और पेन्सिलवेनिया में बाइडेन की जीत के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गईं। लेकिन, कांग्रेस ने इन्हें खारिज कर दिया है। एरिजोना को लेकर मामला ज्यादा फंसा। पहले सीनेट में यहां के नतीजों पर आपत्ति दर्ज कराई गई। जब यहां खारिज हो गई तो मामला हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास पहुंचा। आखिरकार यहां भी ऑब्जेक्शन नकार दिया गया। सीनेट में तो ट्रम्प की पार्टी को मुंह की खानी पड़ी। प्रस्ताव के पक्ष में 6 और विरोध में 93 वोट पड़े। पेन्सिलवेनिया को लेकर रिपब्लिकन सांसद जो हैले ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे आपत्ति दर्ज कराएंगे। उन्होंने ऐसा किया भी। लेकिन, उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।

ट्रम्प के सांसद बोले- ट्रम्प ने समर्थकों को भड़काया
रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर मिट रोमनी ने घटना के बाद कहा- मैं इस घटना की निंदा करता हूं। मैं शर्मिंदा हूं कि हमारे राष्ट्रपति ने दंगाइयों को संसद में घुसने के लिए भड़काया। लोकतंत्र में जीत और हार को स्वीकारने की हिम्मत होनी चाहिए। दंगाइयों को साफ मैसेज है कि वे सच को कबूल करें। मैं अपनी पार्टी के सहयोगियों से भी यही उम्मीद करता हूं कि वे लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आएंगे।
इस बीच, CNN ने दावा किया है कि ट्रम्प कैबिनेट के कुछ मेंबर्स ने एक अर्जेंट मीटिंग की है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 के जरिए ट्रम्प को हटाने पर विचार किया गया है। हालांकि, इस बारे में कोई बयान जारी नहीं किया गया।

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